मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया । परिहरि कोप करिय अब दाया ॥
टूट चाप नहिँ जुरहि रिसाने । बैठिअ होइहिं पाय पिराने ॥
maiṃ tumhāra anucara munirāyā | parihari kopa kariya aba dāyā ||
ṭūṭa cāpa nahim̐ jurahi risāne | baiṭhia hoihiṃ pāya pirāne ||
5 श्लोक · 278 में से 361
लक्ष्मण कहते हैं: मुनिराज, मैं आपका अनुचर हूँ, क्रोध छोड़कर दया कीजिए। टूटा धनुष रिस करने से नहीं जुड़ेगा। बैठ जाइए, पैर दुखते होंगे। यदि धनुष बहुत प्रिय है तो किसी बड़े कारीगर को बुलाकर जुड़वा लीजिए। लक्ष्मण के बोलने से जनक डर जाते हैं और कहते हैं: चुप रहो, यह अनुचित है। लक्ष्मण की निडर वाणी सुन सुनकर परशुराम का शरीर क्रोध से जलता है और बल घटता जाता है। वे श्रीराम पर उलाहना देकर कहते हैं: तेरा छोटा भाई जानकर ही इसे बचा रहा हूँ; यह मन का मैला और तन का सुन्दर है, जैसे विष से भरा सोने का घड़ा। लक्ष्मण फिर हँसे, श्रीराम ने आँखें तरेरीं और वे सकुचाकर गुरु के पास चले गए।
मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया । परिहरि कोप करिय अब दाया ॥
टूट चाप नहिँ जुरहि रिसाने । बैठिअ होइहिं पाय पिराने ॥
maiṃ tumhāra anucara munirāyā | parihari kopa kariya aba dāyā ||
ṭūṭa cāpa nahim̐ jurahi risāne | baiṭhia hoihiṃ pāya pirāne ||
जौँ अति प्रिय तौ करिय उपाई । जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई ॥
बोलत लखनहिं जनक डेराहीं । मष्ट करहु अनुचित भल नाहीँ ॥
jaum̐ ati priya tau kariya upāī | joria kou bar̤a gunī bolāī ||
bolata lakhanahiṃ janaka ḍerāhīṃ | maṣṭa karahu anucita bhala nāhīm̐ ||
थर थर कापहिँ पुर-नर-नारी । छोट कुमार खोट अति भारी ॥
भृगुपति सुनि सुनि निर्भय बानी । रिस तनु जरइ होइ बल हानी ॥
thara thara kāpahim̐ pura-nara-nārī | choṭa kumāra khoṭa ati bhārī ||
bhṛgupati suni suni nirbhaya bānī | risa tanu jarai hoi bala hānī ||
बोले रामहि देइ निहोरा । बचउँ बिचारि बन्धु लघु तोरा ॥
मन-मलीन तन सुन्दर कैसें । बिष-रस-भरा कनक-घट जैसे ॥
bole rāmahi dei nihorā | bacaum̐ bicāri bandhu laghu torā ||
mana-malīna tana sundara kaiseṃ | biṣa-rasa-bharā kanaka-ghaṭa jaise ||
सुनि लछिमन बिहँ से बहुरि, नयन तरेरे राम ।
गुरु-समीप गवने सकुचि, परिहरि बानी बाम ॥
suni lachimana biham̐ se bahuri, nayana tarere rāma |
guru-samīpa gavane sakuci, parihari bānī bāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0