बालकाण्ड

अध्याय 280: फरसा नहीं चलता, दया ही जलाती है

5 श्लोक · 280 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

फरसा नहीं चलता, दया ही जलाती है

परशुराम कहते हैं: हाथ चलता नहीं, क्रोध छाती जला रहा है; राजाओं का घातक फरसा कुण्ठित हो गया। विधाता उलटा हो गया, मेरा स्वभाव ही बदल गया, मेरे हृदय में कब कृपा जागी थी? लक्ष्मण ने मुस्कुराकर सिर नवाया: आपकी कृपा तो दया की मूर्ति है, आपके वचन मानो फूल झड़ रहे हों; यदि कृपा से ही मुनि का शरीर जलता है तो क्रोध में विधाता ही रक्षा करे। परशुराम जनक से बोले: देखो, यह हठी मूर्ख बालक यमपुरी में घर बनाना चाहता है, इसे शीघ्र आँखों से ओझल क्यों नहीं करते? लक्ष्मण मन में हँसे: आँख मूँद लो तो कहीं कोई नहीं। तब परशुराम क्रोध से श्रीराम से बोले: अरे शठ, शम्भु का धनुष तोड़कर तू मुझे ही समझाता है?

280.1

बहइ न हाथ दहइ रिस छाती । भा कुठार कुंठित नृपघाती ॥
भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ । मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ ॥

bahai na hātha dahai risa chātī | bhā kuṭhāra kuṃṭhita nṛpaghātī ||
bhayau bāma bidhi phireu subhāū | more hṛdayam̐ kṛpā kasi kāū ||

280.2

आजु दया दुख दुसह सहावा । सुनि सौमित्र बिहसि सिर नावा ॥
बाउ-कृपा मूरति अनुकूला । बोलत बचन झरत जनु फूला ॥

āju dayā dukha dusaha sahāvā | suni saumitra bihasi sira nāvā ||
bāu-kṛpā mūrati anukūlā | bolata bacana jharata janu phūlā ||

280.3

जौँ पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता । क्रोध भये तनु राखु विधाता ॥
देखु जनक हठि बालक एहू । कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू ॥

jaum̐ pai kṛpām̐ jarihiṃ muni gātā | krodha bhaye tanu rākhu vidhātā ||
dekhu janaka haṭhi bālaka ehū | kīnha cahata jar̤a jamapura gehū ||

280.4

बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा । देखत छोट खोट नृप ढोटा ॥
बिहँसे लखन कहा मन माहीं । मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं ॥

begi karahu kina ām̐khinha oṭā | dekhata choṭa khoṭa nṛpa ḍhoṭā ||
biham̐se lakhana kahā mana māhīṃ | mūdeṃ ām̐khi katahum̐ kou nāhīṃ ||

दो॰ 280दोहा

परसुराम तब राम प्रति, बोले उर अति क्रोध ।
सम्भु सरासन तोरि सठ, करसि हमार प्रबोध ॥

parasurāma taba rāma prati, bole ura ati krodha |
sambhu sarāsana tori saṭha, karasi hamāra prabodha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0