बालकाण्ड

अध्याय 276: गुरुऋण पर लक्ष्मण का ताना

5 श्लोक · 276 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

गुरुऋण पर लक्ष्मण का ताना

लक्ष्मण कहते हैं कि मुनि का शील सारा संसार जानता है। आप माता पिता के ऋण से तो भली भाँति उऋण हुए, केवल गुरु का ऋण रह गया जिसका बड़ा सोच है, और वह मानो हमारे ही माथे मढ़ दिया। ब्याज बहुत बढ़ गया होगा, हिसाब वाले को बुलाइए, मैं तुरन्त थैली खोल दूँ। ये कड़वे वचन सुनकर परशुराम ने फरसा उठाया और सारी सभा हाय हाय कर उठी। लक्ष्मण बोले: मुझे फरसा दिखाते हैं, ब्राह्मण जानकर मैं ही आपको बचा रहा हूँ; आपको रण में कभी कड़े योद्धा नहीं मिले, आप घर के ही शूर हैं। सब लोग अनुचित कहकर पुकारने लगे और श्रीराम ने संकेत से लक्ष्मण को रोक दिया। लक्ष्मण के उत्तर आहुति बनकर क्रोध की अग्नि बढ़ा रहे थे; तब रघुकुलसूर्य जल जैसे शीतल वचन बोले।

276.1

कहेउ लखन मुनि सील तुम्हारा । को नहिं जान बिदित संसारा ॥
माता पितहि उरिन भये नीकें । गुरु रिन रहा सोच बड़जी के ॥

kaheu lakhana muni sīla tumhārā | ko nahiṃ jāna bidita saṃsārā ||
mātā pitahi urina bhaye nīkeṃ | guru rina rahā soca bar̤ajī ke ||

276.2

सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा । दिन चलि गए ब्याज बहु बाढ़ा ॥
अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली । तुरत देउँ मैं थैली खोली ॥

so janu hamarehi māthe kār̤hā | dina cali gae byāja bahu bār̤hā ||
aba ānia byavahariā bolī | turata deum̐ maiṃ thailī kholī ||

276.3

सुनि कटु-बचन कुठार सुधारा । हाय हाय सब सभा पुकारा ॥
भृगुबर परसु देखावहु मोही । विप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही ॥

suni kaṭu-bacana kuṭhāra sudhārā | hāya hāya saba sabhā pukārā ||
bhṛgubara parasu dekhāvahu mohī | vipra bicāri bacaum̐ nṛpadrohī ||

276.4

मिले न कबहुँ, सुभट रन गाढ़े । द्विज-देवता घरहिँ के बाढ़े ॥
अनुचित कहिं सब लोग पुकारे । रघुपति सयनहिँ लखन निवारे ॥

mile na kabahum̐, subhaṭa rana gār̤he | dvija-devatā gharahim̐ ke bār̤he ||
anucita kahiṃ saba loga pukāre | raghupati sayanahim̐ lakhana nivāre ||

दो॰ 276दोहा

लखन उतर आहुति सरिस, भृगुबर कोप कृसानु ।
बढ़त देखि जल सम बचन, बोले रघुकुल-भानु ॥

lakhana utara āhuti sarisa, bhṛgubara kopa kṛsānu |
bar̤hata dekhi jala sama bacana, bole raghukula-bhānu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0