बालकाण्ड

अध्याय 265: सीता प्रभु के चरण नहीं छूतीं

5 श्लोक · 265 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सीता प्रभु के चरण नहीं छूतीं

नगर और आकाश में बाजे बजने लगे, दुष्ट उदास हुए और सज्जन प्रसन्न। देवता, किन्नर, मनुष्य, नाग और मुनीश्वर जय जय कहकर आशीर्वाद देते हैं। देववधुएँ नाचती गाती हैं और बार बार फूलों की अंजलि छूटती है। ब्राह्मण वेद-ध्वनि करते हैं और बंदी विरदावली गाते हैं। पृथ्वी और पाताल में यश फैल गया कि श्रीराम ने धनुष तोड़कर सीता को वरा। नगर के लोग आरती करते हैं और धन की सुध भूलकर निछावर करते हैं। सीता और श्रीराम की जोड़ी ऐसी है मानो सौंदर्य और शृंगार एक जगह आ मिले हों। सखियाँ कहती हैं, सीता, प्रभु के चरण छुओ, पर गौतम की पत्नी की गति याद करके वे डर से चरण नहीं छूतीं। रघुकुलमणि उनकी अलौकिक प्रीति जानकर मन में हँसे।

265.1

पुर अरु ब्योम बाजने बाजे । खल भये मलिन साधु सब राजे ॥
सुर किन्नर नर नाग मुनीसा । जय जय जय कहि देहिँ असीसा ॥

pura aru byoma bājane bāje | khala bhaye malina sādhu saba rāje ||
sura kinnara nara nāga munīsā | jaya jaya jaya kahi dehim̐ asīsā ||

265.2

नाचहिँ गावहिँ बिबुध-बधूटीं । बार बार कुसुमाञ्जलि छूटीं ॥
जहँ तहँ बिन बेद धुनि करहीँ । बन्दी बिरदावलि उच्चरहीं ॥

nācahim̐ gāvahim̐ bibudha-badhūṭīṃ | bāra bāra kusumāñjali chūṭīṃ ||
jaham̐ taham̐ bina beda dhuni karahīm̐ | bandī biradāvali uccarahīṃ ||

265.3

महि पाताल नाक जस ब्यापा । राम बरी सिय भञ्जेउ चापा ॥
करहिँ आरती पुर-नर-नारी । देहिँ निछावरि बित्त बिसारी ॥

mahi pātāla nāka jasa byāpā | rāma barī siya bhañjeu cāpā ||
karahim̐ āratī pura-nara-nārī | dehim̐ nichāvari bitta bisārī ||

265.4

सोहति सीय राम कै जोरी । छबि सिङ्गार मनहुँ एक ठोरी ॥
सखीं कहहिँ प्रभु-पद गहु सीता । करति न चरन परस अति भीता ॥

sohati sīya rāma kai jorī | chabi siṅgāra manahum̐ eka ṭhorī ||
sakhīṃ kahahim̐ prabhu-pada gahu sītā | karati na carana parasa ati bhītā ||

दो॰ 265दोहा

गौतम-तिय गति सुरति करि, नहिँ परसति पग पानि ।
मन बिहँसे रघुबंस मनि, प्रीति अलौकिक जानि ॥

gautama-tiya gati surati kari, nahim̐ parasati paga pāni |
mana biham̐se raghubaṃsa mani, prīti alaukika jāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0