बालकाण्ड

अध्याय 260: सबका बोझ धनुष रूपी जहाज पर

5 श्लोक · 260 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सबका बोझ धनुष रूपी जहाज पर

लक्ष्मण आज्ञा देते हैं, हे दिग्गजो, कच्छप, शेषनाग और वराह, धीरज धरकर पृथ्वी को थामे रहो, श्रीराम शंकर का धनुष तोड़ना चाहते हैं, सावधान हो जाओ। जब श्रीराम धनुष के पास आए तो स्त्री-पुरुषों और देवताओं ने अपने पुण्य मनाए। तुलसीदास जी उपमा देते हैं, सबका संशय और अज्ञान, नीच राजाओं का अभिमान, भृगुपति का गर्व, देवताओं और मुनियों की कायरता, सीता की चिंता, जनक का पछतावा और रानियों के दुख की आग, ये सब शिव-धनुष रूपी जहाज पर चढ़ गए हैं। वे श्रीराम के बाहुबल रूपी अपार समुद्र के पार जाना चाहते हैं, पर कोई केवट नहीं। श्रीराम ने लोगों को चित्र जैसे खड़े देखा, फिर सीता को देखा और उन्हें बहुत व्याकुल जाना।

260.1

दिसकुंजरहु कमठ अहि कोला । धरहु धरनि धरि धीर न डोला ॥
राम चहहिँ सङ्कर धनु तोरा । होहु सजग सुनि आयसु मोरा ॥

disakuṃjarahu kamaṭha ahi kolā | dharahu dharani dhari dhīra na ḍolā ||
rāma cahahim̐ saṅkara dhanu torā | hohu sajaga suni āyasu morā ||

260.2

चाप समीप राम जब आये । नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाये ॥
सब कर संसय अरु अज्ञानू । मन्द महीपन्ह कर अभिमानू ॥

cāpa samīpa rāma jaba āye | nara nārinha sura sukṛta manāye ||
saba kara saṃsaya aru ajñānū | manda mahīpanha kara abhimānū ||

260.3

भृगुपति केरि गरब गरुआई । सुर-मुनिबरन्ह केरि कदराई ॥
सिय कर सोच जनक पछितावा । रानिन्ह कर दारुन-दुख-दावा ॥

bhṛgupati keri garaba garuāī | sura-munibaranha keri kadarāī ||
siya kara soca janaka pachitāvā | rāninha kara dāruna-dukha-dāvā ||

260.4

सम्भु-चाप बड़ बोहित पाई । चढ़े जाइ सब सङ्ग बनाई ॥
राम-बाहुबल, सिन्धु अपारू । चहत पार नहिँ कोउ कड़हारू ॥

sambhu-cāpa bar̤a bohita pāī | car̤he jāi saba saṅga banāī ||
rāma-bāhubala, sindhu apārū | cahata pāra nahim̐ kou kar̤ahārū ||

दो॰ 260दोहा

राम बिलोके लोग सब, चित्र लिखे से देखि ।
चितई सीय कृपायतन, जानी बिकल बिसेखि ॥

rāma biloke loga saba, citra likhe se dekhi |
citaī sīya kṛpāyatana, jānī bikala bisekhi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0