बालकाण्ड

अध्याय 259: सीता का प्रेम-प्रण और लक्ष्मण की पुकार

5 श्लोक · 259 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सीता का प्रेम-प्रण और लक्ष्मण की पुकार

लाज रूपी रात ने वाणी रूपी भौंरी को मुख-कमल में रोक रखा है, और आँसू नेत्रों के कोनों में ऐसे रुके हैं जैसे कंजूस का सोना। धीरज और विश्वास लाकर सीता संकल्प करती हैं, यदि तन, मन और वचन से मेरा प्रण सच्चा है और मन रघुनाथ के चरण-कमलों में रचा है, तो सबके हृदय में बसने वाले भगवान मुझे रघुनाथ की दासी बनाएँगे। जिसका जिस पर सच्चा स्नेह होता है, वह उसे मिलता ही है। कृपानिधान श्रीराम सब जान गए। उन्होंने सीता को देखकर धनुष को ऐसे देखा जैसे गरुड़ छोटे साँप को देखता है। यह देखकर लक्ष्मण पुलकित हुए और पैर से ब्रह्मांड दबाकर बोले।

259.1

गिरा-अलिनि मुख पङ्कज रोकी । प्रगट न लाज-निसा अवलोकी ॥
लोचन जल रह लोचन कोना । जैसे परम कृपन कर सोना ॥

girā-alini mukha paṅkaja rokī | pragaṭa na lāja-nisā avalokī ||
locana jala raha locana konā | jaise parama kṛpana kara sonā ||

259.2

सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी । धरि धीरज प्रतीति उर आनी ॥
तन मन बचन मोर पन साँचा । रघुपति पद सरोज चित राचा ॥

sakucī byākulatā bar̤i jānī | dhari dhīraja pratīti ura ānī ||
tana mana bacana mora pana sām̐cā | raghupati pada saroja cita rācā ||

259.3

तौ भगवान सकल उर बासी । करिहहिँ मोहि रघुपति के दासी ॥
जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू । सो तेहि मिलइ न कछु सन्देहू ॥

tau bhagavāna sakala ura bāsī | karihahim̐ mohi raghupati ke dāsī ||
jehi keṃ jehi para satya sanehū | so tehi milai na kachu sandehū ||

259.4

प्रभु तन चितइ प्रेम पन ठाना । कृपानिधान राम सब जाना ॥
सियहि बिलोकि तकेउ धनु कैसे । चितव गरुड़ लघु ब्यालहि जैसे ॥

prabhu tana citai prema pana ṭhānā | kṛpānidhāna rāma saba jānā ||
siyahi biloki takeu dhanu kaise | citava garur̤a laghu byālahi jaise ||

दो॰ 259दोहा

लखन लखेउ रघुबंस-मनि, ताकेउ हर-कोदंड ।
पुलकि गात बोले बचन, चरन चापि ब्रह्मांडु ॥

lakhana lakheu raghubaṃsa-mani, tākeu hara-kodaṃḍa |
pulaki gāta bole bacana, carana cāpi brahmāṃḍu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0