बालकाण्ड

अध्याय 258: पिता के प्रण पर सीता की व्यथा

5 श्लोक · 258 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

पिता के प्रण पर सीता की व्यथा

नेत्र भरकर शोभा निहारकर सीता को पिता का प्रण याद आया और मन फिर क्षुब्ध हो गया। हाय, पिताजी ने कठोर हठ ठान लिया है, लाभ और हानि कुछ नहीं समझते। मंत्री भी समय पर सीख नहीं देते, विद्वानों की सभा में यह बड़ा अनुचित है। कहाँ वज्र से कठोर धनुष और कहाँ कोमल साँवले किशोर। हे विधाता, धीरज कैसे धरूँ, क्या सिरस के फूल से हीरा छेदा जाता है। सारी सभा की बुद्धि भोली हो गई है, हे शिव-धनुष, अब तुम्हारा ही सहारा है, अपनी जड़ता लोगों पर डालकर रघुनाथ को देखकर हल्के हो जाओ। पल पल सौ युगों जैसा बीतता है। वे प्रभु को देखकर धरती देखती हैं, मानो चंद्रमंडल में कामदेव की दो मछलियाँ खेल रही हों।

258.1

नीकें निरखि नयन भरि सोभा । पितु-पनु सुमिरि बहुरि मन छोभा ॥
अहह तात दारुनि हठ ठानी । समुझत नहिँ कछु लाभ न हानी ॥

nīkeṃ nirakhi nayana bhari sobhā | pitu-panu sumiri bahuri mana chobhā ||
ahaha tāta dāruni haṭha ṭhānī | samujhata nahim̐ kachu lābha na hānī ||

258.2

सचिव सभय सिख देइ न कोई । बुध-समाज बड़ अनुचित होई ॥
कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा । कहँ स्यामल मृदु-गात-किसोरा ॥

saciva sabhaya sikha dei na koī | budha-samāja bar̤a anucita hoī ||
kaham̐ dhanu kulisahu cāhi kaṭhorā | kaham̐ syāmala mṛdu-gāta-kisorā ||

258.3

बिधि केहि भाँति धरउँ उर धीरा । सिरस सुमन कन बेधिअ हीरा ॥
सकल सभा के मति भइ भोरी । अब मोहि सम्भुचाप गति तोरी ॥

bidhi kehi bhām̐ti dharaum̐ ura dhīrā | sirasa sumana kana bedhia hīrā ||
sakala sabhā ke mati bhai bhorī | aba mohi sambhucāpa gati torī ||

258.4

निज जड़ता लोगन्ह पर डारी । होहि हरुअ रघुपतिहि निहारी ॥
अति परिताप सीय मन माहीँ । लव निमेष जुग सब सय जाहीँ ॥

nija jar̤atā loganha para ḍārī | hohi harua raghupatihi nihārī ||
ati paritāpa sīya mana māhīm̐ | lava nimeṣa juga saba saya jāhīm̐ ||

दो॰ 258दोहा

प्रभुहि चितइ पुनि चितव महि, राजत लोचन लोल ।
खेलत मनसिज मीन जुग, जनु बिधु मंडल डोल ॥

prabhuhi citai puni citava mahi, rājata locana lola |
khelata manasija mīna juga, janu bidhu maṃḍala ḍola ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0