बालकाण्ड

अध्याय 255: श्रीराम धनुष की ओर चले, रानी चिंतित

5 श्लोक · 255 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम धनुष की ओर चले, रानी चिंतित

राजाओं की आशा रूपी रात मिट गई और उनके वचन रूपी तारे फीके पड़ गए। अभिमानी राजा कुमुद की तरह सकुचा गए और कपटी राजा उल्लुओं की तरह छिप गए। मुनि और देवता चकवों की तरह शोक से छूटकर फूल बरसाने लगे। गुरु की वंदना करके और मुनियों से आज्ञा लेकर जगत के स्वामी श्रीराम मतवाले हाथी जैसी चाल से सहज ही चले। नगर के स्त्री-पुरुष पुलकित हुए, पितरों और देवताओं की वंदना की और मनाया कि यदि हमारा कुछ पुण्य हो तो गणेश गोसाईं श्रीराम से शिव-धनुष कमल की डंडी की तरह तुड़वा दें। श्रीराम को प्रेम से देखकर सीता की माता ने सखियों को पास बुलाया और स्नेहवश व्याकुल होकर बोलीं।

255.1

नृपन्ह केरि आसा निसि नासी । बचन नखत अवली न प्रकासी ॥
मानी महिप कुमुद सकुचाने । कपटी भूप उलूक लुकाने ॥

nṛpanha keri āsā nisi nāsī | bacana nakhata avalī na prakāsī ||
mānī mahipa kumuda sakucāne | kapaṭī bhūpa ulūka lukāne ||

255.2

भये बिसोक कोक मुनि देवा । बरषहिँ सुमन जनावहिँ सेवा ॥
गुरु-पद बन्दि सहित अनुरागा । राम मुनिन्ह सन आयसु माँगा ॥

bhaye bisoka koka muni devā | baraṣahim̐ sumana janāvahim̐ sevā ||
guru-pada bandi sahita anurāgā | rāma muninha sana āyasu mām̐gā ||

255.3

सहजहिँ चले सकल जग स्वामी । मत्त मञ्जु बर कुञ्जर-गामी ॥
चलत राम सब पुर नर नारी । पुलक-पूरि-तन भये सुखारी ॥

sahajahim̐ cale sakala jaga svāmī | matta mañju bara kuñjara-gāmī ||
calata rāma saba pura nara nārī | pulaka-pūri-tana bhaye sukhārī ||

255.4

बन्दि पितर सुर सुकृत सँभारे । जौँ कछु पुन्य प्रभाउ हमारे ॥
तौ सिव धनु मृनाल की नाँई । तोरहुँ राम गनेस गोसाँई ॥

bandi pitara sura sukṛta sam̐bhāre | jaum̐ kachu punya prabhāu hamāre ||
tau siva dhanu mṛnāla kī nām̐ī | torahum̐ rāma ganesa gosām̐ī ||

दो॰ 255दोहा

रामहिँ प्रेम समेत लखि, सखिन्ह समीप बोलाइ ।
सीता-मातु सनेह-बस, बचन कहइ बिलखाइ ॥

rāmahim̐ prema sameta lakhi, sakhinha samīpa bolāi |
sītā-mātu saneha-basa, bacana kahai bilakhāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0