कहहु काहि यह लाभ न भावा । काहुँ न सङ्कर-चाप चढ़ावा ॥
रहउ चढ़ाउब तोरब भाई । तिल भर भूमि न सके छड़ाई ॥
kahahu kāhi yaha lābha na bhāvā | kāhum̐ na saṅkara-cāpa car̤hāvā ||
rahau car̤hāuba toraba bhāī | tila bhara bhūmi na sake char̤āī ||
5 श्लोक · 252 में से 361
जनक आगे कहते हैं, यह लाभ किसे अच्छा नहीं लगा, पर किसी ने शंकर का धनुष चढ़ाया तक नहीं, तिल भर हिला भी न सका। अब कोई वीर बुरा न माने, मैंने जान लिया कि पृथ्वी वीरों से खाली है। आशा छोड़कर घर जाओ, विधाता ने वैदेही का विवाह लिखा ही नहीं। प्रण छोड़ूँ तो पुण्य जाता है, इसलिए कन्या कुँवारी ही रहे। यदि जानता, तो प्रण करके हँसी न कराता। यह सुनकर सब लोग जानकी को देखकर दुखी हुए। लक्ष्मण क्रोधित हो उठे, भौंहें टेढ़ी हुईं, होंठ फड़के और नेत्र लाल हो गए। रघुवीर के डर से कुछ कह न सके, पर वचन बाण जैसे लगे। तब श्रीराम के चरणों में सिर नवाकर वे प्रमाण भरी वाणी बोले।
कहहु काहि यह लाभ न भावा । काहुँ न सङ्कर-चाप चढ़ावा ॥
रहउ चढ़ाउब तोरब भाई । तिल भर भूमि न सके छड़ाई ॥
kahahu kāhi yaha lābha na bhāvā | kāhum̐ na saṅkara-cāpa car̤hāvā ||
rahau car̤hāuba toraba bhāī | tila bhara bhūmi na sake char̤āī ||
अब जनि कोउ माखै भट मानी । बीर-बिहीन मही मैं जानी ॥
तजहु आस निज निज गृह जाहू । लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू ॥
aba jani kou mākhai bhaṭa mānī | bīra-bihīna mahī maiṃ jānī ||
tajahu āsa nija nija gṛha jāhū | likhā na bidhi baidehi bibāhū ||
सुकृत जाइ जौँ पन परिहरऊँ । कुँअरि कुआरि रहउ का करऊँ ॥
जौँ जनतेउँ बिनु भट भुबि भाई । तौ पन करि होतेउँ न हँसाई ॥
sukṛta jāi jaum̐ pana pariharaūm̐ | kum̐ari kuāri rahau kā karaūm̐ ||
jaum̐ janateum̐ binu bhaṭa bhubi bhāī | tau pana kari hoteum̐ na ham̐sāī ||
जनक बचन सुनि सब नर नारी । देखि जानकिहि भये दुखारी ॥
माखे लखन कुटिल भइँ भौंहें । रद-पट फरकत नयन रिसौंहें ॥
janaka bacana suni saba nara nārī | dekhi jānakihi bhaye dukhārī ||
mākhe lakhana kuṭila bhaim̐ bhauṃheṃ | rada-paṭa pharakata nayana risauṃheṃ ||
कहि न सकत रघुबीर डर, लगे बचन जनु बान ।
नाइ राम-पद-कमल सिर, बोले गिरा प्रमान ॥
kahi na sakata raghubīra ḍara, lage bacana janu bāna |
nāi rāma-pada-kamala sira, bole girā pramāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0