नृप-भुजबल-बिधु सिव-धनु-राहू । गरुअ कठोर बिदित सब काहू ॥
रावन बान महाभट भारे । देखि सरासन गवँहिं सिधारे ॥
nṛpa-bhujabala-bidhu siva-dhanu-rāhū | garua kaṭhora bidita saba kāhū ||
rāvana bāna mahābhaṭa bhāre | dekhi sarāsana gavam̐hiṃ sidhāre ||
5 श्लोक · 250 में से 361
बंदीजन घोषणा करते हैं, राजाओं का भुजबल चंद्रमा है और शिवजी का धनुष राहु। रावण और बाणासुर भी इसे देखकर चुपचाप चले गए। आज जो पुरारि का यह कठोर धनुष तोड़ेगा, तीनों लोकों की विजय सहित वैदेही बिना विचारे उसी को वरेंगी। प्रण सुनकर सब राजा ललचा उठे और अभिमानी योद्धा क्रोधित हुए। कमर कसकर, इष्टदेवों को सिर नवाकर वे चले। तमककर धनुष पकड़ते और करोड़ों उपाय से बल लगाते, पर वह उठता नहीं। विवेकी राजा धनुष के पास गए ही नहीं। मूर्ख राजा धनुष पकड़ते और न उठने पर लजाकर चले जाते, मानो योद्धाओं का बल पाकर धनुष और भारी होता जाता हो।
नृप-भुजबल-बिधु सिव-धनु-राहू । गरुअ कठोर बिदित सब काहू ॥
रावन बान महाभट भारे । देखि सरासन गवँहिं सिधारे ॥
nṛpa-bhujabala-bidhu siva-dhanu-rāhū | garua kaṭhora bidita saba kāhū ||
rāvana bāna mahābhaṭa bhāre | dekhi sarāsana gavam̐hiṃ sidhāre ||
सोइ पुरारि-कोदंड कठोरा । राज-समाज आजु जोइ तोरा ॥
त्रिभुवन-जय-समेत बैदेही । बिनहिँ बिचार बरइ हठि तेही ॥
soi purāri-kodaṃḍa kaṭhorā | rāja-samāja āju joi torā ||
tribhuvana-jaya-sameta baidehī | binahim̐ bicāra barai haṭhi tehī ||
सुनि पन सकल भूप अभिलाखे । भट मानी अतिसय मन माखे ॥
परिकर बाँधि उठे अकुलाई । चले इष्टदेवन्ह सिर नाई ॥
suni pana sakala bhūpa abhilākhe | bhaṭa mānī atisaya mana mākhe ||
parikara bām̐dhi uṭhe akulāī | cale iṣṭadevanha sira nāī ||
तमकि ताकि तकि सिव-धनु धरहीँ । उठइ न कोटि भाँति बल करहीँ ॥
जिन्ह के कछु बिचार मन माहीँ । चाप समीप महीप न जाहीँ ॥
tamaki tāki taki siva-dhanu dharahīm̐ | uṭhai na koṭi bhām̐ti bala karahīm̐ ||
jinha ke kachu bicāra mana māhīm̐ | cāpa samīpa mahīpa na jāhīm̐ ||
तमकि धरहिँ धनु मूढ़ नृप, उठइ न चलहिँ लजाइ ।
मनहुँ पाइ भट बाहु बल, अधिक अधिक गरुआइ ॥
tamaki dharahim̐ dhanu mūr̤ha nṛpa, uṭhai na calahim̐ lajāi |
manahum̐ pāi bhaṭa bāhu bala, adhika adhika garuāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0