बालकाण्ड

अध्याय 249: पुरवासियों की प्रार्थना और जनक के प्रण की घोषणा

5 श्लोक · 249 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

पुरवासियों की प्रार्थना और जनक के प्रण की घोषणा

श्रीराम का रूप और सीता की छवि देखकर स्त्री-पुरुषों ने पलक झपकना छोड़ दिया। सब चिंता करते हैं, पर कहने में सकुचाते हैं और मन ही मन विधाता से विनती करते हैं। हे विधाता, जनक की जड़ता जल्दी हर लो और उन्हें हमारी जैसी सुंदर बुद्धि दो, कि बिना विचारे प्रण छोड़कर राजा सीता का विवाह श्रीराम से कर दें। संसार भला कहेगा और सबको अच्छा लगेगा, हठ करने से अंत में हृदय जलेगा। सब लोग इसी लालसा में मग्न हैं कि साँवला वर ही जानकी के योग्य है। तब जनक ने बंदीजनों को बुलाया, जो विरदावली गाते हुए आए। राजा ने कहा, जाकर मेरा प्रण सुनाओ, और भाट हर्ष से भरकर चले। बंदीजन विशाल भुजाएँ उठाकर बोले, हे सब राजाओ, सुनो, हम विदेह का प्रण कहते हैं।

249.1

राम रूप अरु सिय छबि देखें । नर नारिन्ह परिहरीं निमेखे ॥
सोचहिँ सकल कहत सकुचाहीँ । बिधि सन बिनय करहिँ मन माहीं ॥

rāma rūpa aru siya chabi dekheṃ | nara nārinha pariharīṃ nimekhe ||
socahim̐ sakala kahata sakucāhīm̐ | bidhi sana binaya karahim̐ mana māhīṃ ||

249.2

हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई । मति हमारि असि देहि सुहाई ॥
बिनु बिचार पन तजि नरनाहु । सीय राम कर करइ बिबाहू ॥

haru bidhi begi janaka jar̤atāī | mati hamāri asi dehi suhāī ||
binu bicāra pana taji naranāhu | sīya rāma kara karai bibāhū ||

249.3

जग भल कहिहि भाव सब काहू । हठ कीन्हे अंतहुँ उर दाहू ॥
एहिं लालसाँ मगन सब लोगू । बर साँवरो जानकी जोगू ॥

jaga bhala kahihi bhāva saba kāhū | haṭha kīnhe aṃtahum̐ ura dāhū ||
ehiṃ lālasām̐ magana saba logū | bara sām̐varo jānakī jogū ||

249.4

तब बन्दीजन जनक बोलाये । बिरिदावली कहत चलि आये ॥
कह नृप जाइ कहहु पन मोरा । चले भाट हियँ हरष न थोरा ॥

taba bandījana janaka bolāye | biridāvalī kahata cali āye ||
kaha nṛpa jāi kahahu pana morā | cale bhāṭa hiyam̐ haraṣa na thorā ||

दो॰ 249दोहा

बोले बन्दी बचन बर, सुनहु सकल महिपाल ।
पन बिदेह कर कहहिँ हम, भुजा उठाइ बिसाल ॥

bole bandī bacana bara, sunahu sakala mahipāla |
pana bideha kara kahahim̐ hama, bhujā uṭhāi bisāla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0