बालकाण्ड

अध्याय 25: ब्रह्म और राम दोनों से बड़ा नाम

5 श्लोक · 25 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

ब्रह्म और राम दोनों से बड़ा नाम

राम ने सुग्रीव और विभीषण को शरण दी, नाम ने अनेक दीनों को निहाल किया। राम ने भालू और वानर जुटाए और सेतु के लिए भारी श्रम किया, पर नाम लेते ही भवसागर सूख जाता है। राम ने कुल सहित रावण को मारा, सीता सहित लौटे और अवध से राज किया, जबकि देवता और मुनि गुण गाते रहे। पर नाम का प्रेम से स्मरण करने वाला सेवक बिना श्रम मोह की सेना जीत लेता है और प्रेम में मग्न होकर सुख से विचरता है, उसे सपने में भी चिन्ता नहीं होती। दोहा कहता है कि नाम ब्रह्म और राम दोनों से बड़ा है, वर देने वालों को भी वर देने वाला, और महेश ने यह जानकर सौ करोड़ रामायणों में से इसे चुना।

25.1

राम सुकंठ बिभीषन दोऊ । राखे सरन जान सब कोऊ ॥
नाम गरीब अनेक नेवाजे । लोक बेद बर बिरद बिराजे ॥

rāma sukaṃṭha bibhīṣana doū | rākhe sarana jāna saba koū ||
nāma garība aneka nevāje | loka beda bara birada birāje ||

25.2

राम भालु-कपि-कटक बटोरा । सेतु-हेतु स्रम कीन्ह न थोरा ॥
नाम लेत भव-सिन्धु सुखाहीं । करहु विचार सुजन मन माहीं ॥

rāma bhālu-kapi-kaṭaka baṭorā | setu-hetu srama kīnha na thorā ||
nāma leta bhava-sindhu sukhāhīṃ | karahu vicāra sujana mana māhīṃ ||

25.3

राम सकुल-रन-रावन मारा । सीय सहित निज-पुर पग धारा ॥
राजा राम अवध रजधानी । गावत गुन सुर-मुनि-बर-बानी ॥

rāma sakula-rana-rāvana mārā | sīya sahita nija-pura paga dhārā ||
rājā rāma avadha rajadhānī | gāvata guna sura-muni-bara-bānī ||

25.4

सेवक सुमिरत नाम सप्रीती । बिनु श्रम प्रबल मोह दल जीती ॥
फिरत सनेहँ-मगन सुख अपनें । नाम प्रसाद सोच नहिँ सपनें ॥

sevaka sumirata nāma saprītī | binu śrama prabala moha dala jītī ||
phirata saneham̐-magana sukha apaneṃ | nāma prasāda soca nahim̐ sapaneṃ ||

दो॰ 25दोहा

ब्रह्म-राम-तेँ नाम बड़, बर दायक बर दानि ।
रामचरित-सत कोटि महँ, लिय महेस जियँ जानि ॥

brahma-rāma-tem̐ nāma bar̤a, bara dāyaka bara dāni |
rāmacarita-sata koṭi maham̐, liya mahesa jiyam̐ jāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0