प्रभुहि देखि सब नृप हिय हारे । जनु राकेस उदय भये तारे ॥
अस प्रतीति सब के मन माहीँ । राम चाप तोरब सक नाहीँ ॥
prabhuhi dekhi saba nṛpa hiya hāre | janu rākesa udaya bhaye tāre ||
asa pratīti saba ke mana māhīm̐ | rāma cāpa toraba saka nāhīm̐ ||
5 श्लोक · 245 में से 361
प्रभु को देखकर सब राजा हृदय में हार गए, जैसे पूर्ण चंद्रमा के उगने पर तारे फीके पड़ जाते हैं। सबके मन में विश्वास हो गया कि श्रीराम धनुष तोड़ेंगे, और न तोड़ें तो भी सीता श्रीराम के गले में ही जयमाला डालेंगी। इसलिए भाइयो, यश, प्रताप, बल और तेज गँवाकर घर चलो। यह सुनकर दूसरे राजा हँसे, जो अविवेकी, अंधे और अभिमानी थे। वे बोले, धनुष तोड़ने पर भी विवाह कठिन है, बिना तोड़े राजकुमारी को कौन ब्याहेगा। काल भी सामने आ जाए तो सीता के लिए हम उसे युद्ध में जीत लेंगे। यह सुनकर धर्मशील, सयाने और हरिभक्त राजा मुस्कुराए। वे बोले, श्रीराम राजाओं का गर्व दूर करके सीता को ब्याहेंगे, दशरथ के रणबाँकुरे पुत्रों को युद्ध में कौन जीत सकता है।
प्रभुहि देखि सब नृप हिय हारे । जनु राकेस उदय भये तारे ॥
अस प्रतीति सब के मन माहीँ । राम चाप तोरब सक नाहीँ ॥
prabhuhi dekhi saba nṛpa hiya hāre | janu rākesa udaya bhaye tāre ||
asa pratīti saba ke mana māhīm̐ | rāma cāpa toraba saka nāhīm̐ ||
बिनु भंजेहुँ भव-धनुष विसाला । मेलिहि सीय राम उर माला ॥
अस बिचारि गवनहु घर भाई । जस प्रताप बल तेज गवाँई ॥
binu bhaṃjehum̐ bhava-dhanuṣa visālā | melihi sīya rāma ura mālā ||
asa bicāri gavanahu ghara bhāī | jasa pratāpa bala teja gavām̐ī ||
बिहँसे अपर भूप सुनि बानी । जे अबिबेक अन्ध अभिमानी ॥
तोरेहुँ धनुष ब्याह अवगाहा । बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा ॥
biham̐se apara bhūpa suni bānī | je abibeka andha abhimānī ||
torehum̐ dhanuṣa byāha avagāhā | binu toreṃ ko kuam̐ri biāhā ||
एक बार कालहु किन होऊ । सिय हित समर जितब हम सोऊ ॥
यह सुनि अपर भूप मुसुकाने । धरमसील हरिभगत सयाने ॥
eka bāra kālahu kina hoū | siya hita samara jitaba hama soū ||
yaha suni apara bhūpa musukāne | dharamasīla haribhagata sayāne ||
सीय बिआहबि राम, गरब दूरि करि नृपन्ह को ।
जीति को सक सङ्ग्राम, दसरथ के रन-बाँकुरे ॥
sīya biāhabi rāma, garaba dūri kari nṛpanha ko |
jīti ko saka saṅgrāma, dasaratha ke rana-bām̐kure ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0