बालकाण्ड

अध्याय 246: सज्जन राजाओं की सीख और सीता का आगमन

5 श्लोक · 246 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सज्जन राजाओं की सीख और सीता का आगमन

भक्त राजा आगे कहते हैं, गाल बजाकर व्यर्थ मत मरो, क्या मन के लड्डुओं से भूख मिटती है। हमारी परम पवित्र सीख सुनो, सीता को मन में जगदंबा जानो और श्रीराम को जगत के पिता मानकर नेत्र भरकर उनकी छवि निहार लो। ये दोनों सुंदर, सुख देने वाले और सब गुणों की राशि भाई शिवजी के हृदय में बसते हैं। पास के अमृत-सागर को छोड़कर मृगजल के पीछे दौड़कर क्यों मरते हो। जिसे जो अच्छा लगे करे, हमने तो आज जन्म का फल पा लिया। यह कहकर अच्छे राजा प्रेम से अनुपम रूप निहारने लगे। आकाश में विमानों पर चढ़े देवता देख रहे हैं, फूल बरसाते और सुंदर गान करते हैं। तब सुअवसर जानकर जनक ने सीता को बुलवाया और चतुर सखियाँ आदर से उन्हें लिवा चलीं।

246.1

वृथा मरहु जनि गाल बजाई । मन-मोदकन्हि कि भूख बुताई ॥
सिख हमारि सुनि परम पुनीता । जगदम्बा जानहु जियँ सीता ॥

vṛthā marahu jani gāla bajāī | mana-modakanhi ki bhūkha butāī ||
sikha hamāri suni parama punītā | jagadambā jānahu jiyam̐ sītā ||

246.2

जगत पिता रघुपतिहि बिचारी । भरि लोचन छबि लेहु निहारी ॥
सुन्दर सुखद सकल-गुन-रासी । ये दोउ बन्धु सम्भु-उर-बासी ॥

jagata pitā raghupatihi bicārī | bhari locana chabi lehu nihārī ||
sundara sukhada sakala-guna-rāsī | ye dou bandhu sambhu-ura-bāsī ||

246.3

सुधा समुद्र समीप बिहाई । मृग-जल निरखि मरहु कत धाई ॥
करहु जाइ जा कहँ जोइ भावा । हम तो आजु जनम-फल पावा ॥

sudhā samudra samīpa bihāī | mṛga-jala nirakhi marahu kata dhāī ||
karahu jāi jā kaham̐ joi bhāvā | hama to āju janama-phala pāvā ||

246.4

अस कहि भले भूप अनुरागे । रूप अनूप बिलोकन लागे ॥
देखहिँ सुर नभ चढ़े बिमाना । बरषहिँ सुमन करहिं कल गाना ॥

asa kahi bhale bhūpa anurāge | rūpa anūpa bilokana lāge ||
dekhahim̐ sura nabha car̤he bimānā | baraṣahim̐ sumana karahiṃ kala gānā ||

दो॰ 246दोहा

जानि सुअवसर सीय तब, पठई जनक बोलाइ ।
चतुर सखीं सुन्दर सकल, सादर चलीँ लेवाइ ॥

jāni suavasara sīya taba, paṭhaī janaka bolāi |
catura sakhīṃ sundara sakala, sādara calīm̐ levāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0