जानि, कठिन सिव चाप बिसूरति । चली राखि उर स्यामल मूरति ॥
प्रभु जब जात जानकी जानी । सुख-सनेह सोभा-गुन खानी ॥
jāni, kaṭhina siva cāpa bisūrati | calī rākhi ura syāmala mūrati ||
prabhu jaba jāta jānakī jānī | sukha-saneha sobhā-guna khānī ||
5 श्लोक · 235 में से 361
शिवजी के धनुष को कठोर जानकर सीता चिंतित होकर साँवली मूर्ति हृदय में रखे चल पड़ीं। उन्हें जाते देख प्रभु ने परम प्रेम की कोमल स्याही से उनका चित्र अपने मन में लिख लिया। सीता फिर भवानी के मंदिर गईं और चरणों में प्रणाम करके हाथ जोड़कर बोलीं। हे पर्वतराज की कन्या, आपकी जय हो। महेश के मुखचंद्र की चकोरी, गणेश और षडानन की माता, बिजली जैसी कांति वाली जगज्जननी, आपकी जय हो। आपका न आदि है, न मध्य, न अंत, आपके अपार प्रभाव को वेद भी नहीं जानते। आप संसार की उत्पत्ति, पालन और संहार करती हैं। पतिव्रताओं में माता, आपकी गिनती सबसे पहले है, और आपकी महिमा हजार शारदा और शेष भी नहीं कह सकते।
जानि, कठिन सिव चाप बिसूरति । चली राखि उर स्यामल मूरति ॥
प्रभु जब जात जानकी जानी । सुख-सनेह सोभा-गुन खानी ॥
jāni, kaṭhina siva cāpa bisūrati | calī rākhi ura syāmala mūrati ||
prabhu jaba jāta jānakī jānī | sukha-saneha sobhā-guna khānī ||
परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही । चारु चित भीतर लिख लीन्ही ॥
गई भवानी भवन बहोरी । बन्दि चरन बोली कर जोरी ॥
parama premamaya mṛdu masi kīnhī | cāru cita bhītara likha līnhī ||
gaī bhavānī bhavana bahorī | bandi carana bolī kara jorī ||
जय जय गिरि-बर-राज किसोरी । जय महेस-मुख-चन्द चकोरी ॥
जय गज-बदन षड़ानन-माता । जगत-जननि-दामिनि-दुति गाता ॥
jaya jaya giri-bara-rāja kisorī | jaya mahesa-mukha-canda cakorī ||
jaya gaja-badana ṣar̤ānana-mātā | jagata-janani-dāmini-duti gātā ||
नहिँ तव आदि मध्य अवसाना । अमित प्रभाव बेद नहिँ जाना ॥
भव-भव-विभव-पराभव कारिनि । बिस्व-बिमोहनि स्वबस-बिहारिनि ॥
nahim̐ tava ādi madhya avasānā | amita prabhāva beda nahim̐ jānā ||
bhava-bhava-vibhava-parābhava kārini | bisva-bimohani svabasa-bihārini ||
पतिदेवता सुतीय महँ, मातु प्रथम तव रेख ।
महिमा अमित न सकहिँ कहि, सहस सारदा सेष ॥
patidevatā sutīya maham̐, mātu prathama tava rekha |
mahimā amita na sakahim̐ kahi, sahasa sāradā seṣa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0