बालकाण्ड

अध्याय 23: निर्गुण ब्रह्म से भी बड़ा नाम

5 श्लोक · 23 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

निर्गुण ब्रह्म से भी बड़ा नाम

ब्रह्म के दो स्वरूप हैं, निर्गुण और सगुण, दोनों अकथ और अगाध। तुलसीदास के मत में नाम दोनों से बड़ा है, क्योंकि उसने अपने बल से दोनों को वश में कर रखा है। वे विद्वानों से कहते हैं कि इसे ढिठाई न समझें, यह उनके मन का विश्वास है। दोनों स्वरूपों का ज्ञान अग्नि जैसा है, एक लकड़ी में छिपी, एक प्रकट। दोनों कठिन हैं, पर नाम से दोनों सुगम हो जाते हैं। सत, चेतन और आनन्दघन अविनाशी ब्रह्म हर हृदय में निर्विकार रहता है, फिर भी सब जीव दीन और दुखी हैं। नाम के निरूपण और जप से ही वह प्रकट होता है, जैसे परखने पर ही रत्न का मूल्य प्रकट होता है।

23.1

अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा । अकथ अगाध अनादि अनूपा ॥
मोरें मत बड़ नाम दुहूँ तेँ । किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें ॥

aguna saguna dui brahma sarūpā | akatha agādha anādi anūpā ||
moreṃ mata bar̤a nāma duhūm̐ tem̐ | kie jehiṃ juga nija basa nija būteṃ ||

23.2

प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की । कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की ॥
एक दारु गत देखिय एकू । पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू ॥

pror̤hi sujana jani jānahiṃ jana kī | kahaum̐ pratīti prīti ruci mana kī ||
eka dāru gata dekhiya ekū | pāvaka sama juga brahma bibekū ||

23.3

उभय अगम जुग सुगम नाम तेँ । कहेउँ नाम बड़ ब्रह्म राम तें ॥
व्यापक एक ब्रह्म अबिनासी । सत चेतन धन आनँद रासी ॥

ubhaya agama juga sugama nāma tem̐ | kaheum̐ nāma bar̤a brahma rāma teṃ ||
vyāpaka eka brahma abināsī | sata cetana dhana ānam̐da rāsī ||

23.4

अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी । सकल जीव जग दीन दुखारी ॥
नाम निरूपन नाम जतन तें । सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें ॥

asa prabhu hṛdayam̐ achata abikārī | sakala jīva jaga dīna dukhārī ||
nāma nirūpana nāma jatana teṃ | sou pragaṭata jimi mola ratana teṃ ||

दो॰ 23दोहा

निरगुन तेँ एहि भाँति बड़, नाम प्रभाउ अपार ।
कहउँ नाम बड़ राम तें, निज बिचार अनुसार ॥

niraguna tem̐ ehi bhām̐ti bar̤a, nāma prabhāu apāra |
kahaum̐ nāma bar̤a rāma teṃ, nija bicāra anusāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0