नाम जीहँ जपि जागहीँ जोगी । बिरति बिरञ्चि प्रपञ्च वियोगी ॥
ब्रह्म सुखहि अनुभवहिँ अनूपा । अकथ अनामय नाम न रूपा ॥
nāma jīham̐ japi jāgahīm̐ jogī | birati birañci prapañca viyogī ||
brahma sukhahi anubhavahim̐ anūpā | akatha anāmaya nāma na rūpā ||
5 श्लोक · 22 में से 361
संसार से विरक्त योगी नाम जपकर जाग जाते हैं और नाम रूप से परे ब्रह्मसुख का अनुभव करते हैं। गूढ़ रहस्य जानने वाले नाम जपकर ही जानते हैं। साधक लौ लगाकर जपते हैं और अणिमा आदि सिद्धियाँ पाते हैं। संकट में पड़े लोग जपते हैं और उनके कष्ट मिटते हैं। राम के भक्त चार प्रकार के हैं, चारों निष्पाप और उदार, और चारों का आधार नाम है। इनमें ज्ञानी प्रभु को विशेष प्रिय है। हर युग और हर वेद में नाम का प्रभाव है, पर कलियुग में विशेष, क्योंकि वहाँ दूसरा उपाय नहीं। दोहा कहता है कि सब कामनाओं से रहित, भक्ति रस में लीन जन भी अपने हृदय को नाम प्रेम के अमृत का सरोवर बनाए रखते हैं।
नाम जीहँ जपि जागहीँ जोगी । बिरति बिरञ्चि प्रपञ्च वियोगी ॥
ब्रह्म सुखहि अनुभवहिँ अनूपा । अकथ अनामय नाम न रूपा ॥
nāma jīham̐ japi jāgahīm̐ jogī | birati birañci prapañca viyogī ||
brahma sukhahi anubhavahim̐ anūpā | akatha anāmaya nāma na rūpā ||
जाना चहहिं गूढ़ गति जेऊ । नाम जीहँ जपि जानहिँ तेऊ ॥
साधक नाम जपहिं लव लाये । होहिं सिद्ध अनिमादिक पाये ॥
jānā cahahiṃ gūr̤ha gati jeū | nāma jīham̐ japi jānahim̐ teū ||
sādhaka nāma japahiṃ lava lāye | hohiṃ siddha animādika pāye ||
जपहिँ नाम जन आरत भारी । मिटहिँ कुसङ्कट होहिं सुखारी ॥
राम भगत जग चारि प्रकारा । सुकृती चारिउ अनघ उदारा ॥
japahim̐ nāma jana ārata bhārī | miṭahim̐ kusaṅkaṭa hohiṃ sukhārī ||
rāma bhagata jaga cāri prakārā | sukṛtī cāriu anagha udārā ||
चहूँ चतुर कहँ नाम अधारा । ज्ञानी प्रभुहि बिसेष पियारा ॥
चहुँ जुग चहुँ स्रुति ना प्रभाऊ । कलि बिसेष नहिँ आन उपाऊ ॥
cahūm̐ catura kaham̐ nāma adhārā | jñānī prabhuhi biseṣa piyārā ||
cahum̐ juga cahum̐ sruti nā prabhāū | kali biseṣa nahim̐ āna upāū ||
सकल कामना हीन जे, राम भगति रस लीन ।
नाम प्रेम पीयूष हद, तिन्हहूँ किये मन मीन ॥
sakala kāmanā hīna je, rāma bhagati rasa līna |
nāma prema pīyūṣa hada, tinhahūm̐ kiye mana mīna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0