निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा । सबहीं सन्ध्या-बदन कीन्हा ॥
कहत कथा इतिहास पुरानी । रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी ॥
nisi prabesa muni āyasu dīnhā | sabahīṃ sandhyā-badana kīnhā ||
kahata kathā itihāsa purānī | rucira rajani juga jāma sirānī ||
5 श्लोक · 226 में से 361
रात होते ही मुनि की आज्ञा से सबने संध्या-वंदन किया। विश्वामित्र पुरानी कथाएँ और इतिहास सुनाते रहे और सुंदर रात के दो पहर बीत गए। जब मुनि लेटे तो श्रीराम और लक्ष्मण उनके चरण दबाने लगे। तुलसीदास जी विस्मित होकर कहते हैं कि जिन चरणों के लिए योगी और विरक्त जप, योग और वैराग्य साधते हैं, वही प्रभु प्रेम से हारकर गुरु के चरण-कमल दबा रहे हैं। मुनि के बार बार कहने पर ही श्रीराम सोने गए। फिर लक्ष्मण बड़े प्रेम से भैया के चरण हृदय से लगाकर दबाने लगे, और प्रभु बार बार कहते रहे, तात, अब सो जाओ। भोर में मुर्गे की बाँग सुनकर लक्ष्मण उठे, पर जगत के स्वामी श्रीराम गुरु से भी पहले जाग चुके थे।
निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा । सबहीं सन्ध्या-बदन कीन्हा ॥
कहत कथा इतिहास पुरानी । रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी ॥
nisi prabesa muni āyasu dīnhā | sabahīṃ sandhyā-badana kīnhā ||
kahata kathā itihāsa purānī | rucira rajani juga jāma sirānī ||
मुनिबर सयन कीन्ह तब जाई । लगे चरन चापन दोउ भाई ॥
जिन्ह के चरन-सरोरुह लागी । करत बिबिध जप जोग बिरागी ॥
munibara sayana kīnha taba jāī | lage carana cāpana dou bhāī ||
jinha ke carana-saroruha lāgī | karata bibidha japa joga birāgī ||
तेइ दोउ बन्धु प्रेम जनु जीते । गुरु-पद-पदुम पलोटत प्रीते ॥
बार बार मुनि आज्ञा दीन्ही । रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही ॥
tei dou bandhu prema janu jīte | guru-pada-paduma paloṭata prīte ||
bāra bāra muni ājñā dīnhī | raghubara jāi sayana taba kīnhī ||
चापत चरन लखन उर लाये । सभय सप्रेम परम सचु पाये ॥
पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता । पौढ़े धरि उर पद-जल जाता ॥
cāpata carana lakhana ura lāye | sabhaya saprema parama sacu pāye ||
puni puni prabhu kaha sovahu tātā | paur̤he dhari ura pada-jala jātā ||
उठे लखन निसि बिगत सुनि, अरुनसिखा धुनि कान ।
गुरु तेँ पहिलेहिं जगतपति, जागे राम सुजान ॥
uṭhe lakhana nisi bigata suni, arunasikhā dhuni kāna |
guru tem̐ pahilehiṃ jagatapati, jāge rāma sujāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0