बालकाण्ड

अध्याय 225: गुरु के पास लौटते प्रभु

5 श्लोक · 225 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

गुरु के पास लौटते प्रभु

बालकों को प्रेम के वश जानकर श्रीराम उनके दिखाए हर स्थान की प्रेम से सराहना करते हैं। श्रीराम कोमल, मधुर और मनोहर वचन कहकर छोटे भाई को रचना दिखाते हैं। जिनकी आज्ञा से माया पलक झपकते ब्रह्माण्डों की रचना कर देती है, वही दीनदयालु भक्ति के लिए धनुषयज्ञशाला को चकित होकर देखते हैं। कौतुक देखकर देर हुई जानकर मन में डरते हुए वे गुरु के पास चलते हैं। जिनके भय से डर को भी डर लगता है, वही प्रभु भजन का प्रभाव दिखा रहे हैं। मधुर सुहावनी बातें कहकर वे बालकों को बरबस विदा करते हैं। प्रेम से भरे, अत्यन्त विनीत और संकोच सहित दोनों भाई गुरु के चरणकमलों में सिर नवाकर आज्ञा पाकर बैठते हैं।

225.1

सिसु सब राम प्रेम बस जाने । प्रीति समेत निकेत बखाने ॥
निज निज रुचि सब लेंहिं बोलाई । सहित सनेह जाहिँ दोउ भाई ॥

sisu saba rāma prema basa jāne | prīti sameta niketa bakhāne ||
nija nija ruci saba leṃhiṃ bolāī | sahita saneha jāhim̐ dou bhāī ||

225.2

राम देखावहिँ अनुजहि रचना । कहि मृदु मधुर मनोहर बचना ॥
लव निमेष महँ भुवन-निकाया । रचइ जासु अनुसासन माया ॥

rāma dekhāvahim̐ anujahi racanā | kahi mṛdu madhura manohara bacanā ||
lava nimeṣa maham̐ bhuvana-nikāyā | racai jāsu anusāsana māyā ||

225.3

भगति हेतु सोइ दीनदयाला । चितवत चकित धनुष-मख-साला ॥
कौतुक देखि चले गुरु पाहीँ । जानि बिलम्ब त्रास मन माहीँ ॥

bhagati hetu soi dīnadayālā | citavata cakita dhanuṣa-makha-sālā ||
kautuka dekhi cale guru pāhīm̐ | jāni bilamba trāsa mana māhīm̐ ||

225.4

जासु त्रास डर कहँ डर होई । भजन प्रभाव देखावत सोई ॥
कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं । किये बिदा बालक बरिआई ॥

jāsu trāsa ḍara kaham̐ ḍara hoī | bhajana prabhāva dekhāvata soī ||
kahi bāteṃ mṛdu madhura suhāīṃ | kiye bidā bālaka bariāī ||

दो॰ 225दोहा

सभय सप्रेम बिनीत अति, सकुच सहित दोउ भाइ ।
गुरु-पद-पङ्कज नाइ सिर, बैठे आयसु पाइ ॥

sabhaya saprema binīta ati, sakuca sahita dou bhāi |
guru-pada-paṅkaja nāi sira, baiṭhe āyasu pāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0