बालकाण्ड

अध्याय 227: राजा जनक की फुलवारी में फूल लेने जाना

5 श्लोक · 227 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

राजा जनक की फुलवारी में फूल लेने जाना

श्रीराम और लक्ष्मण ने शौच, स्नान और नित्यकर्म पूरे करके मुनि को प्रणाम किया। समय जानकर गुरु ने पूजा के फूल लाने की आज्ञा दी और दोनों भाई चल पड़े। वे राजा की उत्तम फुलवारी में पहुँचे, जहाँ मानो वसंत ऋतु लुभाकर ठहर गई हो। वहाँ भाँति भाँति के मनोहर वृक्ष थे और रंग बिरंगी बेलों के मंडप तने थे। नए पत्ते, फल और फूल ऐसे सुंदर थे कि अपनी संपदा से वे स्वर्ग के कल्पवृक्षों को भी लजा रहे थे। पपीहे, कोयल, तोते और चकोर कूज रहे थे और मोर नाच रहे थे। बीच में मणियों की सीढ़ियों वाला सुंदर सरोवर था, जिसमें निर्मल जल, अनेक रंगों के कमल, जल-पक्षी और गुंजारते भौंरे थे। बाग और तालाब देखकर प्रभु भाई सहित हर्षित हुए।

227.1

सकल सौच करि जाइ नहाये । नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाये ॥
समय जानि गुरु आयसु पाई । लेन प्रसून चले दोउ भाई ॥

sakala sauca kari jāi nahāye | nitya nibāhi munihi sira nāye ||
samaya jāni guru āyasu pāī | lena prasūna cale dou bhāī ||

227.2

भूप बाग बर देखेउ जाई । जहँ बसन्त-रितु रही लोभाई ॥
लागे बिटप मनोहर नाना । बरन बरन बर बेलि बिताना ॥

bhūpa bāga bara dekheu jāī | jaham̐ basanta-ritu rahī lobhāī ||
lāge biṭapa manohara nānā | barana barana bara beli bitānā ||

227.3

नव-पल्लव फल सुमान सुहाये । निज-सम्पति सुर-रूख लजाये ॥
चातक कोकिल कीर चकोरा । कूजत बिहँग नटत कल मोरा ॥

nava-pallava phala sumāna suhāye | nija-sampati sura-rūkha lajāye ||
cātaka kokila kīra cakorā | kūjata biham̐ga naṭata kala morā ||

227.4

मध्य बाग सर सोह सुहावा । मनि-सोपान बिचित्र बनावा ॥
बिमल सलिल सरसिज बहु रङ्गा । जल-खग-कूजत गुञ्जत भृङ्गा ॥

madhya bāga sara soha suhāvā | mani-sopāna bicitra banāvā ||
bimala salila sarasija bahu raṅgā | jala-khaga-kūjata guñjata bhṛṅgā ||

दो॰ 227दोहा

बाग तड़ाग विलोकि प्रभु, हरषे बन्धु समेत ।
परम-रम्य आराम यह, जो रामहिँ सुख देत ॥

bāga tar̤āga viloki prabhu, haraṣe bandhu sameta |
parama-ramya ārāma yaha, jo rāmahim̐ sukha deta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0