बालकाण्ड

अध्याय 224: बालकों द्वारा धनुषयज्ञ की रंगभूमि दिखाना

5 श्लोक · 224 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

बालकों द्वारा धनुषयज्ञ की रंगभूमि दिखाना

दोनों भाई नगर के पूर्व की ओर जाते हैं, जहाँ धनुषयज्ञ के लिए भूमि बनाई गई है। विस्तृत सुन्दर फ़र्श और सजी हुई वेदी है। चारों ओर सोने के बड़े बड़े मंच बने हैं, जहाँ राजा बैठेंगे। उनके पीछे पास ही चारों ओर दूसरे मंचों का घेरा है, जो कुछ ऊँचा है, जहाँ नगर के लोग बैठेंगे। उनके निकट रंग बिरंगे बड़े सुन्दर उजले भवन बने हैं, जहाँ बैठकर स्त्रियाँ अपने अपने कुल के अनुसार यथायोग्य देखेंगी। नगर के बालक कोमल बातें कहते हुए आदर से प्रभु को यह रचना दिखाते हैं। इसी बहाने प्रेम के वश सब बालक प्रभु के मनोहर शरीर को छूते हैं; दोनों भाइयों को देख देखकर उनके शरीर पुलकित हैं और हृदय में अत्यन्त हर्ष है।

224.1

पुर पूरब-दिसि गे दोउ भाई । जहँ धनु-मख हित भूमि बनाई ॥
अति विस्तार चारु गच ढारी । बिमल-बेदिका रुचिर सँवारी ॥

pura pūraba-disi ge dou bhāī | jaham̐ dhanu-makha hita bhūmi banāī ||
ati vistāra cāru gaca ḍhārī | bimala-bedikā rucira sam̐vārī ||

224.2

चहुँ दिसि कञ्चन मञ्च बिसाला । रचे जहाँ बेठहिं महिपाला ॥
तेहि पाछें समीप चहुँ पासा । अपर मञ्च मंडली बिलासा ॥

cahum̐ disi kañcana mañca bisālā | race jahām̐ beṭhahiṃ mahipālā ||
tehi pācheṃ samīpa cahum̐ pāsā | apara mañca maṃḍalī bilāsā ||

224.3

कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई । बैठहिँ नगर लोग जहँ जाई ॥
तिन्ह के निकट बिसाल सुहाये । धवल धाम बहु बरन बनाये ॥

kachuka ūm̐ci saba bhām̐ti suhāī | baiṭhahim̐ nagara loga jaham̐ jāī ||
tinha ke nikaṭa bisāla suhāye | dhavala dhāma bahu barana banāye ||

224.4

जहँ बैठे देखहिँ सब नारी । जथा जोगु निज-कुल अनुहारी ॥
पुर-बालक कहि कहि मृदु बचना । सादर प्रभुहि देखावहिँ रचना ॥

jaham̐ baiṭhe dekhahim̐ saba nārī | jathā jogu nija-kula anuhārī ||
pura-bālaka kahi kahi mṛdu bacanā | sādara prabhuhi dekhāvahim̐ racanā ||

दो॰ 224दोहा

सब सिसु एहि मिस प्रेम-बस, परसि मनोहर गात ।
तन पुलकहिँ अति हरष हियँ, देखि देखि दोउ भ्रात ॥

saba sisu ehi misa prema-basa, parasi manohara gāta |
tana pulakahim̐ ati haraṣa hiyam̐, dekhi dekhi dou bhrāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0