बालकाण्ड

अध्याय 218: लक्ष्मण को नगर दिखाने की आज्ञा

5 श्लोक · 218 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

लक्ष्मण को नगर दिखाने की आज्ञा

लक्ष्मण के मन में जनकपुर देखने की बड़ी लालसा है, पर प्रभु के भय और मुनि के संकोच से वे कुछ कहते नहीं, बस मन में मुस्कराते हैं। श्रीराम छोटे भाई के मन की बात जान लेते हैं और उनके हृदय में भक्तवत्सलता उमड़ आती है। गुरु की आज्ञा पाकर वे अत्यन्त विनम्रता से, सकुचाते हुए मुस्कराकर कहते हैं, हे नाथ, लक्ष्मण नगर देखना चाहते हैं, पर संकोच से कहते नहीं। आपकी आज्ञा हो तो नगर दिखाकर तुरन्त ले आऊँ। मुनि प्रेम से कहते हैं, राम, तुम नीति क्यों न रखोगे? तुम धर्म के सेतु के रक्षक हो और प्रेम के वश सेवकों को सुख देते हो। सुख के भण्डार दोनों भाई जाकर नगर देख आओ और अपने सुन्दर मुख दिखाकर सबके नेत्र सफल करो।

218.1

लखन हृदयँ लालसा बिसेखी । जाइ जनकपुर आइअ देखी ॥
प्रभु भय बहुरि मुनिहि सकुचाहीँ । प्रगट न कहहिँ मनहिँ मुसुकाहीँ ॥

lakhana hṛdayam̐ lālasā bisekhī | jāi janakapura āia dekhī ||
prabhu bhaya bahuri munihi sakucāhīm̐ | pragaṭa na kahahim̐ manahim̐ musukāhīm̐ ||

218.2

राम अनुज मन की गति जानी । भगत बछलता हिंयँ हुलसानी ॥
परम बिनीत सकुचि मुसुकाई । बोले गुरु अनुसासन पाई ॥

rāma anuja mana kī gati jānī | bhagata bachalatā hiṃyam̐ hulasānī ||
parama binīta sakuci musukāī | bole guru anusāsana pāī ||

218.3

नाथ लखन पुर देखन चहहीँ । प्रभु सकोच डर प्रगट न कहहीँ ॥
जौँ राउर आयसु मैँ पावउँ । नगर देखाइ तुरत लेइ आवउँ ॥

nātha lakhana pura dekhana cahahīm̐ | prabhu sakoca ḍara pragaṭa na kahahīm̐ ||
jaum̐ rāura āyasu maim̐ pāvaum̐ | nagara dekhāi turata lei āvaum̐ ||

218.4

सुनि मुनीस कह बचन सप्रीती । कस न राम तुम्ह राखहु नीती ॥
धरम-सेतु-पालक तुम्ह ताता । प्रेम-बिबस सेवक-सुख-दाता ॥

suni munīsa kaha bacana saprītī | kasa na rāma tumha rākhahu nītī ||
dharama-setu-pālaka tumha tātā | prema-bibasa sevaka-sukha-dātā ||

दो॰ 218दोहा

जाइ देखि आवहु नगर, सुख-निधान दोउ भाइ ।
करहु सुफल सब के नयन, सुन्दर बदन देखाइ ॥

jāi dekhi āvahu nagara, sukha-nidhāna dou bhāi |
karahu suphala saba ke nayana, sundara badana dekhāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0