बालकाण्ड

अध्याय 216: जनक का प्रश्न: ये दोनों बालक कौन हैं

5 श्लोक · 216 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

जनक का प्रश्न: ये दोनों बालक कौन हैं

जनक पूछते हैं: हे नाथ, ये दोनों सुन्दर बालक मुनिकुल के तिलक हैं या राजकुल के पालक? या जिस ब्रह्म को वेद नेति कहते हैं, वही दो रूप धरकर आया है? मेरा मन स्वभाव से वैराग्य रूप है, फिर भी इन्हें देखकर ऐसे बँध गया है जैसे चकोर चन्द्रमा से, और इसने बरबस ब्रह्मसुख छोड़ दिया। सच सच कहिए, छिपाइए मत। मुनि हँसकर कहते हैं, राजन, आपने ठीक कहा; ये सब प्राणियों को प्रिय हैं। यह सुनकर श्रीराम मन में मुस्कराते हैं। मुनि बताते हैं, ये रघुकुल-मणि दशरथ के पुत्र हैं, जिन्हें राजा ने मेरे हित के लिए भेजा। रूप, शील और बल के धाम राम और लक्ष्मण ने मेरा यज्ञ बचाया और संग्राम में असुरों को जीता।

216.1

कहहु नाथ सुन्दर दोउ बालक । मुनिकुल-तिलक कि नृपकुल-पालक ॥
ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा । उभय बेष धरि की सोइ आवा ॥

kahahu nātha sundara dou bālaka | munikula-tilaka ki nṛpakula-pālaka ||
brahma jo nigama neti kahi gāvā | ubhaya beṣa dhari kī soi āvā ||

216.2

सहज बिराग-रूप मन मोरा । थकित होत जिमि चन्द चकोरा ॥
ता तेँ प्रभु पूछउँ सतिभाऊ । कहहु नाथ जनि करहु दुराऊ ॥

sahaja birāga-rūpa mana morā | thakita hota jimi canda cakorā ||
tā tem̐ prabhu pūchaum̐ satibhāū | kahahu nātha jani karahu durāū ||

216.3

इन्हहिँ बिलोकत अति अनुरागा । बरबस ब्रह्म-सुखहि मन त्यागा ॥
कह मुनि बिहँसि कहेहु नप नीका । बचन तुम्हार न होइ अलीका ॥

inhahim̐ bilokata ati anurāgā | barabasa brahma-sukhahi mana tyāgā ||
kaha muni biham̐si kahehu napa nīkā | bacana tumhāra na hoi alīkā ||

216.4

ये प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी । मन मुसुकाहिँ राम सुनि बानी ॥
रघुकुल-मनि दसरथ के जाये । मम हित लागि नरेस पठाये ॥

ye priya sabahi jahām̐ lagi prānī | mana musukāhim̐ rāma suni bānī ||
raghukula-mani dasaratha ke jāye | mama hita lāgi naresa paṭhāye ||

दो॰ 216दोहा

राम लखन दोउ बन्धु बर, रूप-सील-बल धाम ।
मख राखेउ सब साखि जग, जिते असुर सङ्ग्राम ॥

rāma lakhana dou bandhu bara, rūpa-sīla-bala dhāma |
makha rākheu saba sākhi jaga, jite asura saṅgrāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0