बालकाण्ड

अध्याय 207: विश्वामित्र का दशरथ से श्रीराम को माँगना

6 श्लोक · 207 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विश्वामित्र का दशरथ से श्रीराम को माँगना

मुनि का आगमन सुनकर राजा ब्राह्मणों के साथ मिलने जाते हैं, उन्हें अपने आसन पर बिठाकर चरण धोते हैं और भोजन कराते हैं, और कहते हैं कि आज मेरे समान धन्य कोई नहीं। फिर चारों पुत्रों को मुनि के चरणों में डालते हैं। श्रीराम को देखकर विश्वामित्र देह की सुध भूल जाते हैं, जैसे चकोर पूर्ण चन्द्रमा को देखता है। राजा कहते हैं, किस कारण आए, कहिए, मैं तुरन्त करूँगा। मुनि कहते हैं, असुर मुझे सताते हैं, मैं तुमसे माँगने आया हूँ। छोटे भाई सहित रघुनाथ को दो; निशाचरों के वध से मैं सनाथ हो जाऊँगा। मोह छोड़कर प्रसन्न मन से दो; तुम्हें धर्म और सुयश मिलेगा और इनका परम कल्याण होगा।

207.1

मुनि आगमन सुना जब राजा । मिलन गयउ लेइ बिप्र समाजा ॥
करि दंडवत मुनिहि सनमानी । निज आसन बैठारेन्हि आनी ॥

muni āgamana sunā jaba rājā | milana gayau lei bipra samājā ||
kari daṃḍavata munihi sanamānī | nija āsana baiṭhārenhi ānī ||

207.2

चरन पखारि कीन्हि अति पूजा । मो सम आजु धन्य नहिँ दूजा ॥
बिबिध भाँति भोजन करवावा । मुनिबर हृदयँ हरष अति पावा ॥

carana pakhāri kīnhi ati pūjā | mo sama āju dhanya nahim̐ dūjā ||
bibidha bhām̐ti bhojana karavāvā | munibara hṛdayam̐ haraṣa ati pāvā ||

207.3

पुनि चरननि मेले सुत चारी । राम देखि मुनि देह बिसारी ॥
भये मगन देखत मुख सोभा । जनु चकोर पूरन ससि लोभा ॥

puni caranani mele suta cārī | rāma dekhi muni deha bisārī ||
bhaye magana dekhata mukha sobhā | janu cakora pūrana sasi lobhā ||

207.4

तब मन हरषि बचन कह राऊ । मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ ॥
केहि कारन आगमन तुम्हारा । कहहु सो करत न लावउँ बारा ॥

taba mana haraṣi bacana kaha rāū | muni asa kṛpā na kīnhihu kāū ||
kehi kārana āgamana tumhārā | kahahu so karata na lāvaum̐ bārā ||

207.5

असुर समूह सतावहिँ मोही । मैं जाचन आयउँ नृप तोही ॥
अनुज समेत देहु रघुनाथा । निसिचर बध मैं होब सनाथा ॥

asura samūha satāvahim̐ mohī | maiṃ jācana āyaum̐ nṛpa tohī ||
anuja sameta dehu raghunāthā | nisicara badha maiṃ hoba sanāthā ||

दो॰ 207दोहा

देहु भूप मन हरषित, तजहु मोह अज्ञान ।
धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौँ, इन्ह कहँ अति कल्यान ॥

dehu bhūpa mana haraṣita, tajahu moha ajñāna |
dharma sujasa prabhu tumha kaum̐, inha kaham̐ ati kalyāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0