बालकाण्ड

अध्याय 206: विश्वामित्र का दोनों भाइयों को लाने का संकल्प

5 श्लोक · 206 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विश्वामित्र का दोनों भाइयों को लाने का संकल्प

अब कवि आगे की कथा कहते हैं। ज्ञानी विश्वामित्र वन के एक शुभ आश्रम में रहते हैं, जहाँ मुनि जप और यज्ञ करते हैं, पर मारीच और सुबाहु से डरते हैं, जो यज्ञ देखते ही दौड़कर उसे नष्ट कर देते हैं। गाधिपुत्र चिन्ता करते हैं कि ये पापी हरि के बिना नहीं मरेंगे। फिर विचारते हैं कि पृथ्वी का भार हरने के लिए प्रभु ने अवतार लिया है। इसी बहाने उनके चरणों के दर्शन करूँ और विनती करके दोनों भाइयों को ले आऊँ; ज्ञान और वैराग्य के धाम उन प्रभु को आँख भरकर देखूँगा। ऐसे मनोरथ करते हुए वे शीघ्र अयोध्या पहुँचते हैं और सरयू में स्नान करके राजदरबार जाते हैं।

206.1

यह सब चरित कहा मैँ गाई । आगिल कथा सुनहु मन लाई ॥
बिस्वामित्र महामुनि ज्ञानी । बसहिँ बिपिन सुभ आस्त्रम जानी ॥

yaha saba carita kahā maim̐ gāī | āgila kathā sunahu mana lāī ||
bisvāmitra mahāmuni jñānī | basahim̐ bipina subha āstrama jānī ||

206.2

जहँ जप जज्ञ मुनि करहीँ । अति मारीच सुबाहुहि डरहीँ ॥
देखत जज्ञ निसाचर धावहिँ । करहिँ उपद्रव मुनि दुख पावहिँ ॥

jaham̐ japa jajña muni karahīm̐ | ati mārīca subāhuhi ḍarahīm̐ ||
dekhata jajña nisācara dhāvahim̐ | karahim̐ upadrava muni dukha pāvahim̐ ||

206.3

गाधि-तनय मन चिन्ता ब्यापी । हरि बिनु मरहिँ न निसिचर पापी ॥
तब मुनिबर मन कीन्ह बिचारा । प्रभु अवतरेउ हरन महि-भारा ॥

gādhi-tanaya mana cintā byāpī | hari binu marahim̐ na nisicara pāpī ||
taba munibara mana kīnha bicārā | prabhu avatareu harana mahi-bhārā ||

206.4

एहू मिस देखउँ पद जाई । करि बिनती आनौ दोउ भाई ॥
ज्ञान बिराग सकल गुन अयना । सो प्रभु मैँ देखब भरि नयना ॥

ehū misa dekhaum̐ pada jāī | kari binatī ānau dou bhāī ||
jñāna birāga sakala guna ayanā | so prabhu maim̐ dekhaba bhari nayanā ||

दो॰ 206दोहा

बहु बिधि करत मनोरथ, जात लागि नहिँ बार ।
करि भज्जन सरजू-जल, गये भूप-दरबार ॥

bahu bidhi karata manoratha, jāta lāgi nahim̐ bāra |
kari bhajjana sarajū-jala, gaye bhūpa-darabāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0