बालकाण्ड

अध्याय 205: राजकुमार श्रीराम की दिनचर्या

5 श्लोक · 205 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

राजकुमार श्रीराम की दिनचर्या

श्रीराम भाइयों और सखाओं के साथ रोज़ वन में शिकार खेलने जाते हैं, केवल पवित्र मृगों को मारते हैं और लाकर राजा को दिखाते हैं। उनके बाण से मरे मृग देवलोक जाते हैं। वे भाइयों और सखाओं के साथ भोजन करते हैं और माता पिता की आज्ञा मानते हैं। जिस प्रकार पुरवासी सुखी हों, कृपानिधि वही करते हैं। वे मन लगाकर वेद और पुराण सुनते हैं और फिर छोटे भाइयों को समझाते हैं। प्रातः उठकर रघुनाथ माता, पिता और गुरु को सिर नवाते हैं और आज्ञा लेकर नगर के काम करते हैं; यह देखकर राजा हर्षित होते हैं। जो व्यापक, अजन्मा, निर्गुण और नाम रूप से रहित हैं, वही भक्तों के लिए ऐसे अनुपम चरित करते हैं।

205.1

बन्धु सखा सँग लेहिँ बोलाई । बन मृगया नित खेलहिँ जाई ॥
पावन-मृग मारहिँ जियँ जानी । दिन प्रति नृपहि देखावहिँ आनी ॥

bandhu sakhā sam̐ga lehim̐ bolāī | bana mṛgayā nita khelahim̐ jāī ||
pāvana-mṛga mārahim̐ jiyam̐ jānī | dina prati nṛpahi dekhāvahim̐ ānī ||

205.2

जे मृग राम बान के मारे । ते तनु तजि सुरलोक सिधारे ॥
अनुज सखा सँग भोजन करहीँ । मातु पिता अज्ञा अनुसरहीँ ॥

je mṛga rāma bāna ke māre | te tanu taji suraloka sidhāre ||
anuja sakhā sam̐ga bhojana karahīm̐ | mātu pitā ajñā anusarahīm̐ ||

205.3

जेहि बिधि सुखी होहिँ पुर लोगा । करहिँ कृपानिधि सोइ सञ्जोगा ॥
बेद पुरान सुनहिँ मन लाई । आपु कहहिँ अनुजन्ह समुझाई ॥

jehi bidhi sukhī hohim̐ pura logā | karahim̐ kṛpānidhi soi sañjogā ||
beda purāna sunahim̐ mana lāī | āpu kahahim̐ anujanha samujhāī ||

205.4

प्रातकाल उठि कै रघुनाथा । मातु पिता गुरु नावहिँ माथा ॥
आयसु माँगि करहिँ पुर-काजा । देखि चरित हरषइ मन राजा ॥

prātakāla uṭhi kai raghunāthā | mātu pitā guru nāvahim̐ māthā ||
āyasu mām̐gi karahim̐ pura-kājā | dekhi carita haraṣai mana rājā ||

दो॰ 205दोहा

व्यापक अकल अनीह अज, निर्गुन नाम न रूप ।
भगत-हेतु नाना बिधि, करत चरित्र अनूप ॥

vyāpaka akala anīha aja, nirguna nāma na rūpa |
bhagata-hetu nānā bidhi, karata caritra anūpa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0