बालकाण्ड

अध्याय 195: जब सूर्य एक मास तक ठहर गए

5 श्लोक · 195 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

जब सूर्य एक मास तक ठहर गए

कैकेयी और सुमित्रा ने भी सुन्दर पुत्रों को जन्म दिया; उस घड़ी का वर्णन शारदा और शेष भी नहीं कर सकते। अवधपुरी ऐसी शोभित है मानो रात्रि प्रभु से मिलने आई, पर सूर्य को देखकर सकुचाकर सन्ध्या बनी रह गई। अगर-धूप का धुआँ उसका अँधेरा है, उड़ता अबीर उसकी लाली, भवनों की मणियाँ तारे और राजमहल का कलश चन्द्रमा है। कोमल वेदध्वनि मानो सन्ध्या में चहकते पक्षी हैं। यह कौतुक देखकर सूर्यदेव अपने को भूल जाते हैं और एक मास बीत जाता है। महीने भर का एक दिन हो गया और भेद कोई नहीं जान सका; सूर्य रथ समेत थम गए, तो रात कैसे होती?

195.1

कैकय-सुता सुमित्रा दोऊ । सुन्दर-सुत जनमत भैं ओऊ ॥
वह सुख सम्पति समय समाजा । कहि न सकइ सारद अहिराजा ॥

kaikaya-sutā sumitrā doū | sundara-suta janamata bhaiṃ oū ||
vaha sukha sampati samaya samājā | kahi na sakai sārada ahirājā ||

195.2

अवधपुरी सोहइ एहि भाँती । प्रभुहि मिलन आई जनु राती ॥
देखि भानू जनु मन सकुचानी । तदपि बनी सन्ध्या अनुमानी ॥

avadhapurī sohai ehi bhām̐tī | prabhuhi milana āī janu rātī ||
dekhi bhānū janu mana sakucānī | tadapi banī sandhyā anumānī ||

195.3

अगर-धूप बहु जनु अँधिआरी । उड़इ अभीर मनहुँ अरुनारी ॥
मन्दिर-मनि-समूह जनु तारा । नृप गृह कलस सो इन्दु उदारा ॥

agara-dhūpa bahu janu am̐dhiārī | ur̤ai abhīra manahum̐ arunārī ||
mandira-mani-samūha janu tārā | nṛpa gṛha kalasa so indu udārā ||

195.4

भवन बेद-धुनि अति मृदुबानी । जनु खग मुखर समयँ जनु सानी ॥
कौतुक देखि पतङ्ग भुलाना । एक मास तेई जात न जाना ॥

bhavana beda-dhuni ati mṛdubānī | janu khaga mukhara samayam̐ janu sānī ||
kautuka dekhi pataṅga bhulānā | eka māsa teī jāta na jānā ||

दो॰ 195दोहा

मास दिवस कर दिवस भा, मरम न जानइ कोइ ।
रथ समेत रवि थाकेउ, निसा कवनि विधि होइ ॥

māsa divasa kara divasa bhā, marama na jānai koi |
ratha sameta ravi thākeu, nisā kavani vidhi hoi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0