ध्वज पताक तोरन पुर छावा । कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा ॥
सुमनबृष्टि अकास तैँ होई । ब्रह्मानन्द मगन सब लोई ॥
dhvaja patāka torana pura chāvā | kahi na jāi jehi bhām̐ti banāvā ||
sumanabṛṣṭi akāsa taim̐ hoī | brahmānanda magana saba loī ||
5 श्लोक · 194 में से 361
नगर ध्वजाओं, पताकाओं और तोरणों से ऐसा सजता है कि वर्णन नहीं हो सकता; आकाश से फूल बरसते हैं। स्त्रियाँ झुण्ड की झुण्ड, जैसे शृंगार में थीं वैसे ही दौड़ पड़ती हैं और सोने के कलश और मंगल-द्रव्यों के थाल लिए गाती हुई राजद्वार में आती हैं। वे आरती उतारकर निछावर करती हैं और बार बार शिशु के चरणों में पड़ती हैं। मागध, सूत और बन्दीजन रघुनायक के गुण गाते हैं। राजा सबको सर्वस्व दान देते हैं, और पाने वाला भी उसे अपने पास नहीं रखता। कस्तूरी, चन्दन और कुंकुम से गलियों में कीचड़ मच जाता है। घर घर बधाई बजती है और नगर के सब नर नारी हर्षित हैं।
ध्वज पताक तोरन पुर छावा । कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा ॥
सुमनबृष्टि अकास तैँ होई । ब्रह्मानन्द मगन सब लोई ॥
dhvaja patāka torana pura chāvā | kahi na jāi jehi bhām̐ti banāvā ||
sumanabṛṣṭi akāsa taim̐ hoī | brahmānanda magana saba loī ||
बृन्द बृन्द मिलि चलीँ लोगाई । सहज सिंगार किये उठि धाई ॥
कनक-कलस मङ्गल भरि थारा । गावत पैठहिँ भूप-दुआरा ॥
bṛnda bṛnda mili calīm̐ logāī | sahaja siṃgāra kiye uṭhi dhāī ||
kanaka-kalasa maṅgala bhari thārā | gāvata paiṭhahim̐ bhūpa-duārā ||
करि आरती नेवछावरि करहीँ । बार बार सिसु चरनन्हि परहीँ ॥
मागध सूत बन्दि-गन गायक । पावन गुन गावहिँ रघुनायक ॥
kari āratī nevachāvari karahīm̐ | bāra bāra sisu carananhi parahīm̐ ||
māgadha sūta bandi-gana gāyaka | pāvana guna gāvahim̐ raghunāyaka ||
सरबस-दान दीन्ह सब काहू । जेहिं पावा राखा नहिँ ताहू ॥
मृगमद-चन्दन-कुङ्कुम कीचा । मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा ॥
sarabasa-dāna dīnha saba kāhū | jehiṃ pāvā rākhā nahim̐ tāhū ||
mṛgamada-candana-kuṅkuma kīcā | macī sakala bīthinha bica bīcā ||
गृह गृह बाज बधाव सुभ, प्रगटे सुखमा-कन्द ।
हरषवन्त सब जहँ तहँ, नगर नारि-नर-वृन्द ॥
gṛha gṛha bāja badhāva subha, pragaṭe sukhamā-kanda |
haraṣavanta saba jaham̐ taham̐, nagara nāri-nara-vṛnda ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0