ये चार छन्द जन्म की प्रसिद्ध स्तुति हैं। कृपालु प्रभु कौसल्या के हित के लिए प्रकट होते हैं। माता हर्ष से उनका अद्भुत रूप देखती हैं: मेघ के समान श्याम शरीर, सुन्दर नेत्र, चार भुजाओं में आयुध, वक्ष पर वनमाला। वे हाथ जोड़कर कहती हैं, हे अनन्त, आपकी स्तुति कैसे करूँ? आप माया और गुणों से परे हैं, आपके रोम रोम में अनगिनत ब्रह्माण्ड हैं, फिर भी आप मेरे गर्भ में रहे। प्रभु मुस्कराते हैं और पूर्व की कथा सुनाते हैं, जिससे माता उन्हें पुत्र रूप में प्रेम करें। माता की बुद्धि बदलती है; वे कहती हैं, यह रूप छोड़कर शिशुलीला कीजिए। प्रभु तुरन्त नवजात बालक की तरह रोने लगते हैं।
ब्रह्मांड निकाया, निर्मित-माया, रोम रोम प्रति, बेद कहै । मम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति, थिर न रहै ॥ उपजा जब ज्ञाना, प्रभु मुसकाना, चरित बहुत बिधि, कीन्ह चहै । कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत, प्रेम लहै ॥
brahmāṃḍa nikāyā, nirmita-māyā, roma roma prati, beda kahai | mama ura so bāsī, yaha upahāsī, sunata dhīra mati, thira na rahai || upajā jaba jñānā, prabhu musakānā, carita bahuta bidhi, kīnha cahai | kahi kathā suhāī, mātu bujhāī, jehi prakāra suta, prema lahai ||
माता पुनि बोली, सो मति डौली, तजहु तात यह रूपा । कीजिय सिसुलीला, अति प्रिय-सोला, यह सुख परम अनूपा ॥ सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना, होइ बालक सुर-भूपा । यह चरित जे गावहिँ, हरि पद पावहिँ, ते न परहिँ भव-कूपा ॥
mātā puni bolī, so mati ḍaulī, tajahu tāta yaha rūpā | kījiya sisulīlā, ati priya-solā, yaha sukha parama anūpā || suni bacana sujānā, rodana ṭhānā, hoi bālaka sura-bhūpā | yaha carita je gāvahim̐, hari pada pāvahim̐, te na parahim̐ bhava-kūpā ||