बालकाण्ड

अध्याय 188: देवताओं का वानर रूप और राजा दशरथ का परिचय

5 श्लोक · 188 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

देवताओं का वानर रूप और राजा दशरथ का परिचय

देवता अपने धाम लौटते हैं और पृथ्वी के मन को विश्राम मिलता है। ब्रह्मा की आज्ञा से प्रसन्न होकर वे बिना देर किए पृथ्वी पर अतुलित बलवाले वनचरों के रूप में जन्म लेते हैं। पर्वत, वृक्ष और नख ही उनके शस्त्र हैं; वे धीरज से हरि की राह देखते हैं और पर्वतों और वनों में अपनी अपनी सेनाएँ लेकर भर जाते हैं। अब कवि बीच में छोड़ी कथा पर लौटते हैं। अवधपुरी में रघुकुल-मणि राजा दशरथ राज करते हैं, जिनका नाम वेद में प्रसिद्ध है। वे धर्मधुरन्धर, ज्ञानी और शार्ङ्गधनुषधारी भगवान के भक्त हैं। कौसल्या आदि उनकी प्रिय रानियाँ पवित्र आचरण वाली, पति के अनुकूल और हरि के चरणकमलों में विनीत हैं।

188.1

गये देव सब निज निज धामा । भूमि सहित मन कहँ बिस्रामा ॥
जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा । हरषे देव बिलम्ब न कीन्हा ॥

gaye deva saba nija nija dhāmā | bhūmi sahita mana kaham̐ bisrāmā ||
jo kachu āyasu brahmām̐ dīnhā | haraṣe deva bilamba na kīnhā ||

188.2

बनचर देइ धरी छिति माहीँ । अतुलित बल-प्रताप तिन्ह पाहीँ ॥
गिरि-तरु-नख आयुध सब बीरा । हरि मारग चितवहिँ मतिधीरा ॥

banacara dei dharī chiti māhīm̐ | atulita bala-pratāpa tinha pāhīm̐ ||
giri-taru-nakha āyudha saba bīrā | hari māraga citavahim̐ matidhīrā ||

188.3

गिरि कानन जहँ तहँ महि पूरी । रहे निज निज अनीक रचि रूरी ॥
यह सब रुचिर चरित मैँ भाखा । अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा ॥

giri kānana jaham̐ taham̐ mahi pūrī | rahe nija nija anīka raci rūrī ||
yaha saba rucira carita maim̐ bhākhā | aba so sunahu jo bīcahiṃ rākhā ||

188.4

अवधपुरीं रघुकुल-मनि राऊ । बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ ॥
धरम-धुरन्धर गुन-निधि ज्ञानी । हृदयँ भगति मति सारँग-पानी ॥

avadhapurīṃ raghukula-mani rāū | beda bidita tehi dasaratha nāūm̐ ||
dharama-dhurandhara guna-nidhi jñānī | hṛdayam̐ bhagati mati sāram̐ga-pānī ||

दो॰ 188दोहा

कौसल्यादि नारि प्रिय, सब आचरन पुनीत ।
पति अनुकूल प्रेम दृढ़, हरि-पद-कमल बिनीत ॥

kausalyādi nāri priya, saba ācarana punīta |
pati anukūla prema dṛr̤ha, hari-pada-kamala binīta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0