जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा । तुम्हहिँ लागि धरिहउँ नर-बेसा ॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा । लेहउँ दिनकर-बंस उदारा ॥
jani ḍarapahu muni siddha suresā | tumhahim̐ lāgi dharihaum̐ nara-besā ||
aṃsanha sahita manuja avatārā | lehaum̐ dinakara-baṃsa udārā ||
6 श्लोक · 187 में से 361
आकाशवाणी कहती है: हे मुनियो, सिद्धो और इन्द्र, डरो मत। तुम्हारे लिए मैं अपने अंशों सहित उदार सूर्यवंश में मनुष्य रूप धरूँगा। कश्यप और अदिति ने बड़ा तप करके मुझसे वर पाया था; वे ही अब कोसल के राजा दशरथ और रानी कौसल्या हैं। उनके घर मैं चार भाइयों के रूप में आऊँगा। नारद के वचन सत्य करूँगा, अपनी पराशक्ति के साथ अवतार लूँगा और पृथ्वी का सारा भार हरूँगा। यह सुनकर देवता शीतल हृदय से लौटते हैं और ब्रह्मा पृथ्वी को धीरज बँधाते हैं। जाते समय वे देवताओं को सिखाते हैं कि वानर का शरीर धरकर पृथ्वी पर जाओ और हरि के चरणों की सेवा करो।
जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा । तुम्हहिँ लागि धरिहउँ नर-बेसा ॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा । लेहउँ दिनकर-बंस उदारा ॥
jani ḍarapahu muni siddha suresā | tumhahim̐ lāgi dharihaum̐ nara-besā ||
aṃsanha sahita manuja avatārā | lehaum̐ dinakara-baṃsa udārā ||
कस्यप अदिति महा तप कीन्हा । तिन्ह कहँ मैँ पूरब बर दीन्हा ॥
ते दसरथ-कौसल्या रूपा । कोसलपुरीं प्रगट नर-भूपा ॥
kasyapa aditi mahā tapa kīnhā | tinha kaham̐ maim̐ pūraba bara dīnhā ||
te dasaratha-kausalyā rūpā | kosalapurīṃ pragaṭa nara-bhūpā ||
तिन्ह के गृह अवतरिहउँ जाई । रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई ॥
नारद बचन सत्य सब करिहउँ । परम सक्ति समेत अवतरिहउँ ॥
tinha ke gṛha avatarihaum̐ jāī | raghukula tilaka so cāriu bhāī ||
nārada bacana satya saba karihaum̐ | parama sakti sameta avatarihaum̐ ||
हरिहउँ सकल भूमि गरुआई । निर्भय होहु देव समुदाई ॥
गगन ब्रह्म-बानी सुनि काना । तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना ॥
harihaum̐ sakala bhūmi garuāī | nirbhaya hohu deva samudāī ||
gagana brahma-bānī suni kānā | turata phire sura hṛdaya jur̤ānā ||
तब ब्रह्मा धरनिहि समुझावा । अभय भई भरोस जियँ आवा ॥
taba brahmā dharanihi samujhāvā | abhaya bhaī bharosa jiyam̐ āvā ||
निज लोकहि बिरज्चि गे, देवन्ह इहइ सिखाइ ।
बानर-तनु धरि धरि महि, हरि-पद सेवहु जाइ ॥
nija lokahi birajci ge, devanha ihai sikhāi |
bānara-tanu dhari dhari mahi, hari-pada sevahu jāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0