यह समूह ब्रह्मा की छन्दबद्ध स्तुति है, जो वे भयभीत देवताओं और पृथ्वी की ओर से गाते हैं। हे देवताओं के स्वामी, शरणागत के रक्षक, गौ और ब्राह्मण के हितकारी, असुरों के शत्रु, लक्ष्मीपति, आपकी जय हो; आपकी करनी का भेद कोई नहीं जानता। हे अविनाशी, घट घट के वासी, माया से रहित, जिनका ध्यान मुनि दिन रात करते हैं, आपकी जय हो। आपने बिना सहायक के त्रिगुणमयी सृष्टि रची; हम भक्ति और पूजा नहीं जानते, आप ही हमारी चिन्ता कीजिए। शारदा, वेद और शेष भी आपको नहीं जानते; हे दीनों के प्यारे, द्रवित होइए। इस प्रेमभरी प्रार्थना को सुनकर गम्भीर आकाशवाणी होती है, जो शोक और सन्देह हर लेती है।
जय जय सुर-नायक, जन सुख-दायक, प्रनतपाल भगवन्ता । गो-द्विज-हितकारी, जय असुरारी, सिन्धु-सुता प्रिय कन्ता ॥ पालन सुर धरनी, अदभुत-करनी, मरम न जानइ कोई । जो सहज कृपाला, दीनदयाला, करहु अनुग्रह सोई ॥
jaya jaya sura-nāyaka, jana sukha-dāyaka, pranatapāla bhagavantā | go-dvija-hitakārī, jaya asurārī, sindhu-sutā priya kantā || pālana sura dharanī, adabhuta-karanī, marama na jānai koī | jo sahaja kṛpālā, dīnadayālā, karahu anugraha soī ||