मेघनाद कहँ पुनि हँकरावा । दीन्ही सिख बल बयर बढ़ावा ॥
जे सुर समर-धीर बलवाना । जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना ॥
meghanāda kaham̐ puni ham̐karāvā | dīnhī sikha bala bayara bar̤hāvā ||
je sura samara-dhīra balavānā | jinha keṃ laribe kara abhimānā ||
9 श्लोक · 182 में से 361
फिर रावण मेघनाद को बुलाकर उसका बल और बैर भड़काता है: बल के अभिमानी देवताओं को रण में जीतकर बाँध लाओ। पुत्र पिता की आज्ञा सिर पर लेता है। तब रावण स्वयं गदा लेकर चलता है। उसके चलने से धरती डोलती है और उसकी गर्जना से देवांगनाओं के गर्भ गिर जाते हैं। देवता सुमेरु की गुफाओं में जा छिपते हैं। दिक्पालों के लोक उसे सूने मिलते हैं। रण के मद में वह जग भर घूमता है, पर कोई जोड़ का योद्धा नहीं मिलता। सूर्य, चन्द्रमा, पवन, वरुण, कुबेर, अग्नि, काल और यम सब उसके चरणों में झुकते हैं। वह अपनी ही मन्त्रणा से राज करता है और अपने भुजबल से बहुत सी सुन्दर स्त्रियों को जीत लाता है।
मेघनाद कहँ पुनि हँकरावा । दीन्ही सिख बल बयर बढ़ावा ॥
जे सुर समर-धीर बलवाना । जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना ॥
meghanāda kaham̐ puni ham̐karāvā | dīnhī sikha bala bayara bar̤hāvā ||
je sura samara-dhīra balavānā | jinha keṃ laribe kara abhimānā ||
तिन्हहिँ जीति रन आनेसु बाँधी । उठि सुत पितु-अनुसासन काँधी ॥
एहि बिधि सबही आज्ञा दीन्ही । आपुन चलेउ गदा कर लीन्ही ॥
tinhahim̐ jīti rana ānesu bām̐dhī | uṭhi suta pitu-anusāsana kām̐dhī ||
ehi bidhi sabahī ājñā dīnhī | āpuna caleu gadā kara līnhī ||
चलत दसानन डोलति अवनी । गर्जत गर्भ-स्त्रवहिं सुर-रवनी ॥
रावन आवत सुनेउ सकोहा । देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा ॥
calata dasānana ḍolati avanī | garjata garbha-stravahiṃ sura-ravanī ||
rāvana āvata suneu sakohā | devanha take meru giri khohā ||
दिगपालन्ह के लोक सुहाये । सूने सकल दसानन पाये ॥
पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी । देइ देवतन्ह गारि पचारी ॥
digapālanha ke loka suhāye | sūne sakala dasānana pāye ||
puni puni siṃghanāda kari bhārī | dei devatanha gāri pacārī ||
रन-मद मत्त फिरइ जग धावा । प्रतिभट खोजत कतहुँ न पावा ॥
रवि ससि पवन बरुन धन-धारी । अगिनि काल जम सब अधिकारी ॥
rana-mada matta phirai jaga dhāvā | pratibhaṭa khojata katahum̐ na pāvā ||
ravi sasi pavana baruna dhana-dhārī | agini kāla jama saba adhikārī ||
किन्नर सिद्ध मनुज सुर नागा । हठि सबही के पंथहिं लागा ॥
ब्रह्म-सृष्टि जहँ लगि तनु-धारी । दसमुख-बसबर्ती नर नारी ॥
kinnara siddha manuja sura nāgā | haṭhi sabahī ke paṃthahiṃ lāgā ||
brahma-sṛṣṭi jaham̐ lagi tanu-dhārī | dasamukha-basabartī nara nārī ||
आयसु कहिँ सकल भयभीता । नवहिँ आइ नित चरन बिनीता ॥
āyasu kahim̐ sakala bhayabhītā | navahim̐ āi nita carana binītā ||
भुज-बल बिस्व बस्य करि, राखेसि कोउ न सुतन्त्र ।
मंडलीक-मनि रावन, राज करइ निज-मन्त्र ॥
bhuja-bala bisva basya kari, rākhesi kou na sutantra |
maṃḍalīka-mani rāvana, rāja karai nija-mantra ||
देव जच्छ गन्धर्व नर, किन्नर नाग कुमारि ।
जीति बरीं निज-बाहु-बल, बहु सुन्दर बर नारि ॥
deva jaccha gandharva nara, kinnara nāga kumāri |
jīti barīṃ nija-bāhu-bala, bahu sundara bara nāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0