काम-रूप जानहिँ सब माया । सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया ॥
दसमुख बैठ सभाँ एक बारा । देखि अमित आपन परिवारा ॥
kāma-rūpa jānahim̐ saba māyā | sapanehum̐ jinha keṃ dharama na dāyā ||
dasamukha baiṭha sabhām̐ eka bārā | dekhi amita āpana parivārā ||
5 श्लोक · 181 में से 361
राक्षस इच्छा के अनुसार रूप धर लेते हैं और सब प्रकार की माया जानते हैं; धर्म और दया उनमें सपने में भी नहीं है। एक दिन दशमुख रावण सभा में बैठा अपने अपार परिवार को देखता है: पुत्र, पौत्र, सेवक, निशाचरों की ऐसी जाति जिसकी गिनती कोई नहीं कर सकता। सेना देखकर उसका स्वाभाविक अभिमान उमड़ता है और वह क्रोध और मद से भरे वचन बोलता है। देवता हमारे शत्रु हैं, पर वे सामने आकर नहीं लड़ते, बलवान शत्रु देखकर भाग जाते हैं। उन्हें मारने का एक ही उपाय है। जहाँ ब्राह्मण-भोजन, यज्ञ, होम और श्राद्ध हो, वहाँ जाकर विघ्न डालो। भूख से क्षीण और बलहीन देवता अपने आप मेरे पास आ मिलेंगे, तब मैं उन्हें मारूँगा या भली भाँति अपने वश में रखूँगा।
काम-रूप जानहिँ सब माया । सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया ॥
दसमुख बैठ सभाँ एक बारा । देखि अमित आपन परिवारा ॥
kāma-rūpa jānahim̐ saba māyā | sapanehum̐ jinha keṃ dharama na dāyā ||
dasamukha baiṭha sabhām̐ eka bārā | dekhi amita āpana parivārā ||
सुत-समूह जन परिजन नाती । गे को पार निसाचर जाती ॥
सेन बिलोकि सहज अभिमानी । बोला बचन क्रोध-मद-सानी ॥
suta-samūha jana parijana nātī | ge ko pāra nisācara jātī ||
sena biloki sahaja abhimānī | bolā bacana krodha-mada-sānī ||
सुनहु सकल रजनीचर जूथा । हमरे बैरी बिबुध-बरूथा ॥
ते सनमुख नहिँ करहिँ लराई । देखि सबल-रिपु जाहिँ पराई ॥
sunahu sakala rajanīcara jūthā | hamare bairī bibudha-barūthā ||
te sanamukha nahim̐ karahim̐ larāī | dekhi sabala-ripu jāhim̐ parāī ||
तिन्ह कर मरन एक बिधि होई । कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई ॥
द्विज-भोजन मख होम सराधा । सब के जाइ करहु तुम्ह बाधा ॥
tinha kara marana eka bidhi hoī | kahaum̐ bujhāi sunahu aba soī ||
dvija-bhojana makha homa sarādhā | saba ke jāi karahu tumha bādhā ||
छुधा-छीन बल-हीन सुर, सहजेहिं मिलिहहिँ आइ ।
तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ, भली भाँति अपनाइ ॥
chudhā-chīna bala-hīna sura, sahajehiṃ milihahim̐ āi |
taba mārihaum̐ ki chār̤ihaum̐, bhalī bhām̐ti apanāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0