बालकाण्ड

अध्याय 180: रावण का बल और उसके योद्धा

5 श्लोक · 180 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

रावण का बल और उसके योद्धा

रावण का सुख, सम्पत्ति, पुत्र, सेना, सहायक, विजय, प्रताप, बल, बुद्धि और बड़ाई नित्य नए बढ़ते जाते थे, जैसे हर लाभ पर लोभ बढ़ता है। अत्यन्त बलवान कुम्भकर्ण जैसा उसका भाई था, जिसके जोड़ का योद्धा जगत में नहीं जन्मा। वह मदिरा पीकर छह महीने सोता था, और उसके जागते ही तीनों लोकों में त्रास हो जाता था। यदि वह प्रतिदिन भोजन करता, तो सारा विश्व शीघ्र ही चौपट हो जाता। रावण का बड़ा पुत्र मेघनाद था, जिसका जगत के योद्धाओं में पहला स्थान था। देवपुरी में उससे नित्य भगदड़ मचती थी। दुर्मुख, अकम्पन, वज्रदन्त, धूमकेतु, अतिकाय आदि ऐसे योद्धाओं का समूह था, जिनमें हर एक अकेला ही संसार को जीत सकता था।

180.1

सुख सम्पति सुत सेन सहाई । जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई ॥
नित नूतन सब बाढ़त जाई । जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई ॥

sukha sampati suta sena sahāī | jaya pratāpa bala buddhi bar̤āī ||
nita nūtana saba bār̤hata jāī | jimi prati lābha lobha adhikāī ||

180.2

अति बल कुम्भकरन अस भ्राता । जेहि कहँ नहिँ प्रतिभट जग जाता ॥
करइ पान सोवइ षट मासा । जागत होइ तिहुँ-पुर त्रासा ॥

ati bala kumbhakarana asa bhrātā | jehi kaham̐ nahim̐ pratibhaṭa jaga jātā ||
karai pāna sovai ṣaṭa māsā | jāgata hoi tihum̐-pura trāsā ||

180.3

जौँ दिन-प्रति अहार कर सोई । बिस्व बेगि सब चौपट होई ॥
समर धीर नहिँ जाइ बखाना । तेहि सम अमित बीर बलवाना ॥

jaum̐ dina-prati ahāra kara soī | bisva begi saba caupaṭa hoī ||
samara dhīra nahim̐ jāi bakhānā | tehi sama amita bīra balavānā ||

180.4

बारिदनाद जेठ सुत तासू । भट महँ प्रथम लीक जग जासू ॥
जेहि न होइ रन-सनमुख कोई । सुर-पुर नितहिं परावन होई ॥

bāridanāda jeṭha suta tāsū | bhaṭa maham̐ prathama līka jaga jāsū ||
jehi na hoi rana-sanamukha koī | sura-pura nitahiṃ parāvana hoī ||

दो॰ 180दोहा

कुमुख अकम्पन कुलिसरद, धूमकेतु अतिकाय ।
एक एक जग जीति सक, ऐसे सुभट निकाय ॥

kumukha akampana kulisarada, dhūmaketu atikāya |
eka eka jaga jīti saka, aise subhaṭa nikāya ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0