बालकाण्ड

अध्याय 179: लंका पर अधिकार और कैलास उठाना

5 श्लोक · 179 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

लंका पर अधिकार और कैलास उठाना

पहले वहाँ बड़े बड़े राक्षस योद्धा रहते थे, जिन्हें देवताओं ने युद्ध में मार डाला। अब इन्द्र की प्रेरणा से वहाँ यक्षराज कुबेर के एक करोड़ रक्षक रहते थे। रावण को कहीं से यह खबर मिली, तो उसने सेना सजाकर किले को घेर लिया। बड़े विकट योद्धा और भारी सेना देखकर यक्ष प्राण लेकर भाग गए। रावण ने घूमकर सारा नगर देखा, उसकी चिन्ता मिट गई और उसे बड़ा सुख हुआ। नगर को सुन्दर और स्वभाव से ही दुर्गम जानकर रावण ने वहीं अपनी राजधानी बनाई। सब राक्षसों को योग्य घर दिए। एक बार उसने कुबेर पर चढ़ाई की और पुष्पक विमान जीत लाया। फिर खेल ही खेल में जाकर उसने कैलास पर्वत उठा लिया, मानो अपनी भुजाओं का बल तौल रहा हो, और बड़ा सुख पाकर लौटा।

179.1

रहे तहाँ निसिचर भट भारे । ते सब सुरन्ह समर सङ्घारे ॥
अब तहँ रहहिँ सक्र के प्रेरे । रच्छक कोटि जच्छपति केरे ॥

rahe tahām̐ nisicara bhaṭa bhāre | te saba suranha samara saṅghāre ||
aba taham̐ rahahim̐ sakra ke prere | racchaka koṭi jacchapati kere ||

179.2

दसमुख कतहुँ खबरि असि पाई । सेन साजि गढ़ घेरेसि जाई ॥
देखि बिकट भट बड़ि कटकाई । जच्छ जीव लेइ गयउ पराई ॥

dasamukha katahum̐ khabari asi pāī | sena sāji gar̤ha gheresi jāī ||
dekhi bikaṭa bhaṭa bar̤i kaṭakāī | jaccha jīva lei gayau parāī ||

179.3

फिरि सब नगर दसानन देखा । गयउ सोच सुख भयउ बिसेखा ॥
सुन्दर सहज अगम अनुमानी । कीन्ह तहाँ रावन रजधानी ॥

phiri saba nagara dasānana dekhā | gayau soca sukha bhayau bisekhā ||
sundara sahaja agama anumānī | kīnha tahām̐ rāvana rajadhānī ||

179.4

जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे । सुखी सकल रजनीचर कीन्हे ॥
एक बार कुबेर पर धावा । पुष्पक-जानि जीति लेइ आवा ॥

jehi jasa joga bām̐ṭi gṛha dīnhe | sukhī sakala rajanīcara kīnhe ||
eka bāra kubera para dhāvā | puṣpaka-jāni jīti lei āvā ||

दो॰ 179दोहा

कौतुकहीं कैलास पुनि, लीन्हेसि जाइ उठाइ ।
मनहुँ तौलि निज बाहुबल, चला बहुत सुख पाइ ॥

kautukahīṃ kailāsa puni, līnhesi jāi uṭhāi |
manahum̐ tauli nija bāhubala, calā bahuta sukha pāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0