तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाये । हरषित ते अपने गृह आये ॥
मय-तनुजा मन्दोदरि नामा । परम-सुन्दरी नारि-ललामा ॥
tinhi dei bara brahma sidhāye | haraṣita te apane gṛha āye ||
maya-tanujā mandodari nāmā | parama-sundarī nāri-lalāmā ||
6 श्लोक · 178 में से 361
उन्हें वर देकर ब्रह्मा चले गए और तीनों भाई प्रसन्न होकर घर लौटे। मय दानव की कन्या मन्दोदरी परम सुन्दरी थी। मय ने उसे लाकर रावण को दे दिया, यह जानकर कि यह राक्षसों का राजा होगा। अच्छी पत्नी पाकर रावण प्रसन्न हुआ और फिर जाकर दोनों भाइयों का विवाह कराया। समुद्र के बीच त्रिकूट नाम का पर्वत था, जिसे ब्रह्मा ने रचा था और जो बड़ा दुर्गम था। मय दानव ने उसे फिर सजाया और सोने तथा मणियों के अनगिनत भवन बनाए। भोगवती और अमरावती से भी सुन्दर वह नगर लंका नाम से जगत में विख्यात हुआ। गहरा समुद्र उसकी खाईं था और परकोटा सोने का। हरि की प्रेरणा से जिस कल्प में जो राक्षसराज होता है, वही अपने दल सहित वहाँ बसता है।
तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाये । हरषित ते अपने गृह आये ॥
मय-तनुजा मन्दोदरि नामा । परम-सुन्दरी नारि-ललामा ॥
tinhi dei bara brahma sidhāye | haraṣita te apane gṛha āye ||
maya-tanujā mandodari nāmā | parama-sundarī nāri-lalāmā ||
सोइ मयं दीन्हि रावनहि आनी । होइहि जातुधान-पति जानी ॥
हरषित भयउ नारि भलि पाई । पुनि दोउ बन्धु बिआहेसि जाई ॥
soi mayaṃ dīnhi rāvanahi ānī | hoihi jātudhāna-pati jānī ||
haraṣita bhayau nāri bhali pāī | puni dou bandhu biāhesi jāī ||
गिरि-त्रिकूट एक सिन्धु मँझारी । बिधि-निर्मित दुर्गम अति भारी ॥
सोइ मय दानवँ बहुरि सँवारा । कनक रचित मनि भवन अपारा ॥
giri-trikūṭa eka sindhu mam̐jhārī | bidhi-nirmita durgama ati bhārī ||
soi maya dānavam̐ bahuri sam̐vārā | kanaka racita mani bhavana apārā ||
भोगावति जसि अहि-कुल बासा । अमरावति जसि सक्र-निवासा ॥
तिन्ह तेँ अधिक रम्य अति बङ्का । जग बिख्यात नाम तेहि लङ्का ॥
bhogāvati jasi ahi-kula bāsā | amarāvati jasi sakra-nivāsā ||
tinha tem̐ adhika ramya ati baṅkā | jaga bikhyāta nāma tehi laṅkā ||
खाईं सिन्धु गभीर अति, चारिहुँ दिसि फिरि आव ।
कनक-कोट मनि-खचित दृढ़, बरनि न जाइ बनाव ॥
khāīṃ sindhu gabhīra ati, cārihum̐ disi phiri āva |
kanaka-koṭa mani-khacita dṛr̤ha, barani na jāi banāva ||
हरि प्रेरित जेहिं कलप जोइ, जातुधान-पति होइ ।
सूर प्रतापी अतुल-बल, दल समेत बस सोइ ॥
hari prerita jehiṃ kalapa joi, jātudhāna-pati hoi |
sūra pratāpī atula-bala, dala sameta basa soi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0