बालकाण्ड

अध्याय 177: तीनों भाइयों को वरदान

5 श्लोक · 177 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

तीनों भाइयों को वरदान

तीनों भाइयों ने अनेक प्रकार का तप किया। तप देखकर ब्रह्मा पास गए और बोले, हे तात, मैं प्रसन्न हूँ, वर माँगो। रावण ने चरण पकड़कर कहा, वानर और मनुष्य इन दो जातियों को छोड़ हम और किसी के मारे न मरें। शिवजी पार्वती से कहते हैं कि मैंने और ब्रह्मा ने मिलकर उसे वर दिया, ऐसा ही हो, तुमने बड़ा तप किया है। फिर वे कुम्भकर्ण के पास गए। यदि यह दुष्ट नित्य आहार करेगा तो सारा संसार उजड़ जाएगा। तब शारदा को प्रेरित करके उसकी बुद्धि फेर दी गई और उसने छह महीने की नींद माँगी। फिर विभीषण के पास जाकर कहा, पुत्र, वर माँगो। उसने भगवान के चरणकमलों में निर्मल प्रेम माँगा।

177.1

कीन्ह बिबिध तप तीनिउँ भाई । परम उग्र नहिं बरनि सो जाई ॥
गयउ निकट तप देखि बिधाता । माँगहु बर प्रसन्न मैँ ताता ॥

kīnha bibidha tapa tīnium̐ bhāī | parama ugra nahiṃ barani so jāī ||
gayau nikaṭa tapa dekhi bidhātā | mām̐gahu bara prasanna maim̐ tātā ||

177.2

करि बिनती पद गहि दससीसा । बोलेउ बचन सुनहु जगदीसा ॥
हम काहू के मरहिँ न मारें । बानर मनुज जाति दुई बारें ॥

kari binatī pada gahi dasasīsā | boleu bacana sunahu jagadīsā ||
hama kāhū ke marahim̐ na māreṃ | bānara manuja jāti duī bāreṃ ||

177.3

एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा । मैँ ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा ॥
पुनि प्रभु कुम्भकरन पहिँ गयऊ । तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ ॥

evamastu tumha bar̤a tapa kīnhā | maim̐ brahmām̐ mili tehi bara dīnhā ||
puni prabhu kumbhakarana pahim̐ gayaū | tehi biloki mana bisamaya bhayaū ||

177.4

जौँ एहिं खल नित करब अहारू । होइहि सब उजारि संसारू ॥
सारद प्रेरि तासु मति फेरी । मागेसि नींद मास षट केरी ॥

jaum̐ ehiṃ khala nita karaba ahārū | hoihi saba ujāri saṃsārū ||
sārada preri tāsu mati pherī | māgesi nīṃda māsa ṣaṭa kerī ||

दो॰ 177दोहा

गये बिभीषन पास पुनि, कहेउ पुत्र घर माँगु ।
तेहिं मागेउ भगवन्त पद,-कमल अमल अनुरागु ॥

gaye bibhīṣana pāsa puni, kaheu putra ghara mām̐gu |
tehiṃ māgeu bhagavanta pada,-kamala amala anurāgu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0