बालकाण्ड

अध्याय 176: प्रतापभानु बना रावण

5 श्लोक · 176 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

प्रतापभानु बना रावण

याज्ञवल्क्य आगे कहते हैं, हे मुनि, समय आने पर वही राजा अपने समाज सहित राक्षस हुआ। उसके दस सिर और बीस भुजाएँ थीं, और वह रावण नाम का बड़ा प्रचण्ड वीर था। राजा का छोटा भाई अरिमर्दन बल का धाम कुम्भकर्ण हुआ। जो धर्मरुचि उसका मन्त्री था, वह उसका सौतेला छोटा भाई हुआ, जिसे जगत विभीषण के नाम से जानता है, जो विष्णु का भक्त और विज्ञान का भण्डार था। राजा के जो पुत्र और सेवक थे, वे सब बड़े भयानक राक्षस हुए। वे इच्छा से रूप बदलने वाले, कुटिल, निर्दयी, हिंसक और पापी थे, सारे विश्व को सताने वाले। यद्यपि वे पुलस्त्य के पवित्र, निर्मल और अनुपम कुल में जन्मे, तब भी ब्राह्मणों के शाप से सब पाप के रूप हो गए।

176.1

काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा । भयउ निसाचर सहित समाजा ॥
दस-सिर ताहि बीस-भुजदंडा । रावन नाम बीर बरिवंडा ॥

kāla pāi muni sunu soi rājā | bhayau nisācara sahita samājā ||
dasa-sira tāhi bīsa-bhujadaṃḍā | rāvana nāma bīra barivaṃḍā ||

176.2

भूप अनुज अरिमर्दन नामा । भयउ सो कुम्भकरन बल धामा ॥
सचिव जो रहा धरमरुचि जासू । भयउ बिमात्र-बन्धु लघु तासू ॥

bhūpa anuja arimardana nāmā | bhayau so kumbhakarana bala dhāmā ||
saciva jo rahā dharamaruci jāsū | bhayau bimātra-bandhu laghu tāsū ||

176.3

नाम विभीषन जेहि जग जाना । बिष्नु-भगत विज्ञान-निधाना ॥
रहे जे सुत सेवक नृप केरे । भये निसाचर घोर घनेरे ॥

nāma vibhīṣana jehi jaga jānā | biṣnu-bhagata vijñāna-nidhānā ||
rahe je suta sevaka nṛpa kere | bhaye nisācara ghora ghanere ||

176.4

काम-रूप खल जिनस अनेका । कुटिल भयङ्कर बिगत-बिबेका ॥
कृपा-रहित हिंसक सब पापी । बरनि न जाहिँ बिस्व परितापी ॥

kāma-rūpa khala jinasa anekā | kuṭila bhayaṅkara bigata-bibekā ||
kṛpā-rahita hiṃsaka saba pāpī | barani na jāhim̐ bisva paritāpī ||

दो॰ 176दोहा

उपजे जदपि पुलस्त्य-कुल, पावन अमल अनूप ।
तदपि महीसुर साप-बस, भये साल अघ-रूप ॥

upaje jadapi pulastya-kula, pāvana amala anūpa |
tadapi mahīsura sāpa-basa, bhaye sāla agha-rūpa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0