बालकाण्ड

अध्याय 173: आकाशवाणी और ब्राह्मणों का शाप

5 श्लोक · 173 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

आकाशवाणी और ब्राह्मणों का शाप

पुरोहित ने वेदों में कहे अनुसार छहों रस और चारों प्रकार के भोजन बनाए। उसने अनेक पशुओं का मांस पकाया और उस दुष्ट ने उसमें ब्राह्मणों का मांस मिला दिया। सब ब्राह्मणों को भोजन के लिए बुलाया गया। जैसे ही राजा परोसने लगे, उसी समय आकाशवाणी हुई, हे ब्राह्मणो, उठ उठकर अपने घर जाओ, यह अन्न मत खाओ, इसमें बड़ी हानि है, रसोई में ब्राह्मण का मांस बना है। विश्वास मानकर सब ब्राह्मण उठ खड़े हुए। राजा व्याकुल हो गए, मोह से बुद्धि भूल गई, और होनी के वश मुँह से एक बात भी न निकली। तब ब्राह्मणों ने बिना कुछ विचारे क्रोध में शाप दिया, हे मूढ़ राजा, तू परिवार सहित जाकर राक्षस हो जा।

173.1

उपरोहित जेवनार बनाई । छरस चारि बिधि जसि स्त्रुति गाई ॥
माया-मय तेहिं कीन्हि रसोई । बिञ्जन बहु गनि सकइ न कोई ॥

uparohita jevanāra banāī | charasa cāri bidhi jasi struti gāī ||
māyā-maya tehiṃ kīnhi rasoī | biñjana bahu gani sakai na koī ||

173.2

बिबिध मृगन्ह कर आमिष राँधा । तेहि महँ बिप्र मास खल साँधा ॥
भोजन कह सब बिप्र बोलाये । पद पखारि आसन बैठाये ॥

bibidha mṛganha kara āmiṣa rām̐dhā | tehi maham̐ bipra māsa khala sām̐dhā ||
bhojana kaha saba bipra bolāye | pada pakhāri āsana baiṭhāye ||

173.3

परुसन जबहिँ लाग महिपाला । भइ अकास-वानी तेहि काला ॥
बिप्र-वृन्द उठि उठि गृह जाहू । है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू ॥

parusana jabahim̐ lāga mahipālā | bhai akāsa-vānī tehi kālā ||
bipra-vṛnda uṭhi uṭhi gṛha jāhū | hai bar̤i hāni anna jani khāhū ||

173.4

भयउ रसोईं भूसुर माँसू । सब द्विज उठे मानि बिस्वासू ॥
भूप विकल मति मोहँ भुलानी । भावी बस आव मुख बानी ॥

bhayau rasoīṃ bhūsura mām̐sū | saba dvija uṭhe māni bisvāsū ||
bhūpa vikala mati moham̐ bhulānī | bhāvī basa āva mukha bānī ||

दो॰ 173दोहा

बोले बिप्र सकोप तब, नहिँ कछु कीन्ह बिचार ।
जाइ निसाचर होहु नृप, मूढ़ सहित परिवार ॥

bole bipra sakopa taba, nahim̐ kachu kīnha bicāra |
jāi nisācara hohu nṛpa, mūr̤ha sahita parivāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0