बालकाण्ड

अध्याय 16: अयोध्या, कौसल्या और राजा दशरथ

5 श्लोक · 16 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

अयोध्या, कौसल्या और राजा दशरथ

तुलसीदास पवित्र अयोध्या और कलि के पाप धोने वाली सरयू को प्रणाम करते हैं, और नगर के नर नारियों को, जिन पर प्रभु की बड़ी ममता थी। प्रभु ने सीता की निन्दा करने वालों के पाप भी मिटाकर उन्हें शोकरहित लोक में बसाया। वे कौसल्या को उस पूर्व दिशा के रूप में प्रणाम करते हैं जिसमें रघुपति रूपी चन्द्रमा उदित हुए, जो जगत को सुख और दुष्ट रूपी कमलों को पाला देते हैं। सब रानियों सहित राजा दशरथ को वे कर्म, मन और वाणी से प्रणाम करते हैं और पुत्र का सेवक जानकर कृपा माँगते हैं। राम के माता पिता को रचकर ब्रह्मा भी बड़े हुए। सोरठा उन अवधराज को नमन करता है जिन्होंने राम से बिछुड़ते ही प्रिय शरीर तिनके की तरह त्याग दिया।

16.1

बन्दउँ अवध पुरी अति पावनि । सरजू-सरि कलि-कलुष-नसावनि ॥
प्रनवउँ पुर-नर-नारि बहोरी । ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी ॥

bandaum̐ avadha purī ati pāvani | sarajū-sari kali-kaluṣa-nasāvani ||
pranavaum̐ pura-nara-nāri bahorī | mamatā jinha para prabhuhi na thorī ||

16.2

सिय-निन्दक अघ-ओघ नसाये । लोक बिसोक बनाइ बसाये ॥
बन्दउँ कौसल्या दिसि प्राची । कीरति जासु सकल जग माची ॥

siya-nindaka agha-ogha nasāye | loka bisoka banāi basāye ||
bandaum̐ kausalyā disi prācī | kīrati jāsu sakala jaga mācī ||

16.3

प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू । बिस्व-सुखद खल-कमल-तुसारू ॥
दसरथ राउ सहित सब रानी । सुकृत-सुमङ्गल मूरति मानी ॥

pragaṭeu jaham̐ raghupati sasi cārū | bisva-sukhada khala-kamala-tusārū ||
dasaratha rāu sahita saba rānī | sukṛta-sumaṅgala mūrati mānī ||

16.4

करउँ प्रनाम करम-मन-बानी । करहु कृपा सुत-सेवक जानी ॥
जिन्हहिँ बिरचि बड़ भयउ विधाता । महिमा-अवधि राम-पितु-माता ॥

karaum̐ pranāma karama-mana-bānī | karahu kṛpā suta-sevaka jānī ||
jinhahim̐ biraci bar̤a bhayau vidhātā | mahimā-avadhi rāma-pitu-mātā ||

16.सो॰ 16सोरठा

बन्दउँ अवध भुआल, सत्य प्रेम जेहि राम पद ।
बिछुरत दीनदयाल, प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ ॥

bandaum̐ avadha bhuāla, satya prema jehi rāma pada |
bichurata dīnadayāla, priya tanu tṛna iva parihareu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0