फिरत बिपिन आस्रम एक देखा । तहँ बस नृपति कपट-मुनि बेखा ॥
जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई । समर सेन तजि गयउ पराई ॥
phirata bipina āsrama eka dekhā | taham̐ basa nṛpati kapaṭa-muni bekhā ||
jāsu desa nṛpa līnha char̤āī | samara sena taji gayau parāī ||
5 श्लोक · 158 में से 361
वन में फिरते हुए राजा ने एक आश्रम देखा। वहाँ कपट से मुनि का वेष बनाए एक राजा रहता था, जिसका देश प्रतापभानु ने छीन लिया था और जो सेना छोड़कर युद्ध से भाग गया था। ग्लानि से वह घर नहीं गया और अभिमान से विजेता से मिला भी नहीं। क्रोध को मन में दबाकर वह कंगाल की तरह तपस्वी के वेष में वन में रहता था। राजा उसके पास गए और उसने तुरन्त पहचान लिया कि यह प्रतापभानु है। प्यासे राजा ने उसे नहीं पहचाना और सुन्दर वेष देखकर उसे महामुनि समझा। घोड़े से उतरकर उन्होंने प्रणाम किया, पर बड़े चतुर होने से अपना नाम नहीं बताया। राजा को प्यासा देखकर उसने सरोवर दिखा दिया, और राजा ने घोड़े सहित प्रसन्न होकर स्नान और जलपान किया।
फिरत बिपिन आस्रम एक देखा । तहँ बस नृपति कपट-मुनि बेखा ॥
जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई । समर सेन तजि गयउ पराई ॥
phirata bipina āsrama eka dekhā | taham̐ basa nṛpati kapaṭa-muni bekhā ||
jāsu desa nṛpa līnha char̤āī | samara sena taji gayau parāī ||
समय प्रताप-भानु कर जानी । आपन अति असमय अनुमानी ॥
गयउ न गृह मन बहुत गलानी । मिला न राजहि नृप अभिमानी ॥
samaya pratāpa-bhānu kara jānī | āpana ati asamaya anumānī ||
gayau na gṛha mana bahuta galānī | milā na rājahi nṛpa abhimānī ||
रिस उर मारि रङ्क जिमि राजा । बिपिन बसइ तापस कें साजा ॥
तासु समीप गवन नृप कीन्हा । यह प्रताप-रवि तेहि तब चीन्हा ॥
risa ura māri raṅka jimi rājā | bipina basai tāpasa keṃ sājā ||
tāsu samīpa gavana nṛpa kīnhā | yaha pratāpa-ravi tehi taba cīnhā ||
राउ तृषित नहिँ सो पहिचाना । देखि सुबेष महामुनि जाना ॥
उतरि तुरग तेँ कीन्ह प्रनामा । परम चतुर न कहेउ निज नामा ॥
rāu tṛṣita nahim̐ so pahicānā | dekhi subeṣa mahāmuni jānā ||
utari turaga tem̐ kīnha pranāmā | parama catura na kaheu nija nāmā ||
भूपति तृषित बिलोकि तेहिं, सरवर दीन्ह देखाइ ।
भज्जन पान समेत हय, कीन्ह नृपति हरषाइ ॥
bhūpati tṛṣita biloki tehiṃ, saravara dīnha dekhāi |
bhajjana pāna sameta haya, kīnha nṛpati haraṣāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0