बालकाण्ड

अध्याय 157: वन में भटककर प्यास से अचेत

5 श्लोक · 157 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

वन में भटककर प्यास से अचेत

घोड़े को तेजी से आते देखकर सूअर पवन के वेग से भागा। राजा ने तुरन्त धनुष पर बाण चढ़ाया, बाण देखते ही वह धरती से सट गया। वह कभी प्रकट होता, कभी छिपता हुआ भागता गया, और राजा क्रोध के वश उसके पीछे लगे रहे। सूअर बहुत दूर ऐसे घने वन में चला गया जहाँ हाथी घोड़े का निबाह नहीं था। राजा को बड़ा धीर देखकर सूअर भागकर पहाड़ की गहरी गुफा में घुस गया। वहाँ पहुँचना कठिन देखकर राजा बहुत पछताकर लौटे, पर उस महावन में रास्ता भूल गए। थके, भूखे और प्यासे राजा घोड़े सहित व्याकुल होकर नदी तालाब खोजते रहे और जल के बिना अचेत हो गए।

157.1

आवत देखि अधिक रव बाजी । चलेउ बराह मरुत-गति भाजी ॥
तुरत कीन्ह नृप सर सन्धाना । महि मिलि गयउ बिलोकत बाना ॥

āvata dekhi adhika rava bājī | caleu barāha maruta-gati bhājī ||
turata kīnha nṛpa sara sandhānā | mahi mili gayau bilokata bānā ||

157.2

तकि तकि तीर महीस चलावा । करि छल सुअर सरीर बचावा ॥
प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा । रिस बस भूप चलेउ सँग लागा ॥

taki taki tīra mahīsa calāvā | kari chala suara sarīra bacāvā ||
pragaṭata durata jāi mṛga bhāgā | risa basa bhūpa caleu sam̐ga lāgā ||

157.3

गयउ दूरि घन-गहन बराहू । जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू ॥
अति अकेल बन बिपुल कलेसू । तदपि न मृग-मग तजइ नरेसू ॥

gayau dūri ghana-gahana barāhū | jaham̐ nāhina gaja bāji nibāhū ||
ati akela bana bipula kalesū | tadapi na mṛga-maga tajai naresū ||

157.4

कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा । भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा ॥
अगम देखि नृप अति पछिताई । फिरेउ महाबन परेउ भुलाई ॥

kola biloki bhūpa bar̤a dhīrā | bhāgi paiṭha giriguhām̐ gabhīrā ||
agama dekhi nṛpa ati pachitāī | phireu mahābana pareu bhulāī ||

दो॰ 157दोहा

खेद-खिन्न छुद्धित तृषित, राजा बाजि समेत ।
खोजत ब्याकुल सरित सर, जल बिनु भयउ अचेत ॥

kheda-khinna chuddhita tṛṣita, rājā bāji sameta |
khojata byākula sarita sara, jala binu bhayau aceta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0