बालकाण्ड

अध्याय 152: प्रभु का सत्य वचन

5 श्लोक · 152 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

प्रभु का सत्य वचन

प्रभु आगे कहते हैं, अपनी इच्छा से मनुष्य का वेष सजाकर मैं तुम्हारे घर प्रकट होऊँगा। हे तात, अपने अंशों सहित देह धारण करके मैं भक्तों को सुख देने वाले चरित करूँगा, जिन्हें आदर से सुनकर बड़भागी मनुष्य ममता और मद छोड़कर भवसागर से तर जाएँगे। जिस आदिशक्ति ने जगत को उत्पन्न किया, वह मेरी माया भी अवतार लेगी। मैं तुम्हारी अभिलाषा पूरी करूँगा, मेरा प्रण सत्य है, सत्य है, सत्य है। बार बार ऐसा कहकर कृपानिधान भगवान अन्तर्धान हो गए। दम्पति हृदय में कृपालु की भक्ति धरकर कुछ समय उस आश्रम में रहे, फिर समय आने पर सहज ही शरीर छोड़कर अमरावती में जा बसे। याज्ञवल्क्य कहते हैं कि यह अत्यन्त पवित्र इतिहास शिवजी ने उमा से कहा, अब राम जन्म का एक और कारण सुनो।

152.1

इच्छामय नर-बेष सँवारें । होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे ॥
अंसन्ह सहित देह धरि ताता । करिहउँ चरित भगत-सुख-दाता ॥

icchāmaya nara-beṣa sam̐vāreṃ | hoihaum̐ pragaṭa niketa tumhāre ||
aṃsanha sahita deha dhari tātā | karihaum̐ carita bhagata-sukha-dātā ||

152.2

जे सुनि सादर नर बड़भागी । भव तरिहहिँ ममता-मद त्यागी ॥
आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया । सोउ अवतरिहि मोरि यह माया ॥

je suni sādara nara bar̤abhāgī | bhava tarihahim̐ mamatā-mada tyāgī ||
ādisakti jehiṃ jaga upajāyā | sou avatarihi mori yaha māyā ||

152.3

पुरउब मैँ अभिलाष तुम्हारा । सत्य सत्य पन सत्य हमारा ॥
पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना । अन्तरधान भये भगवाना ॥

purauba maim̐ abhilāṣa tumhārā | satya satya pana satya hamārā ||
puni puni asa kahi kṛpānidhānā | antaradhāna bhaye bhagavānā ||

152.4

दम्पति उर धरि भगति कृपाला । तेहिं आश्रम निवसे कछु काला ॥
समय पाइ तनु तजि अनयासा । जाइ कीन्ह अमरावति बासा ॥

dampati ura dhari bhagati kṛpālā | tehiṃ āśrama nivase kachu kālā ||
samaya pāi tanu taji anayāsā | jāi kīnha amarāvati bāsā ||

दो॰ 152दोहा

यह इतिहास पुनीत अति, उमहि कहा वृषकेतु ।
भरद्वाज सुनु अपर पुनि, राम-जनम कर हेतु ॥

yaha itihāsa punīta ati, umahi kahā vṛṣaketu |
bharadvāja sunu apara puni, rāma-janama kara hetu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0