बालकाण्ड

अध्याय 151: मनु और शतरूपा को वरदान

5 श्लोक · 151 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

मनु और शतरूपा को वरदान

शतरूपा के कोमल, गूढ़ और सुन्दर वचन सुनकर कृपासिन्धु कोमल वाणी में बोले, तुम्हारे मन में जो कुछ रुचि है, वह सब मैंने दे दिया, इसमें संशय नहीं। हे माता, मेरी कृपा से तुम्हारा अलौकिक विवेक कभी नहीं मिटेगा। तब मनु ने एक और विनती की। आपके चरणों में मेरी प्रीति वैसी हो जैसी पुत्र में होती है, चाहे कोई मुझे बड़ा मूढ़ ही क्यों न कहे। जैसे मणि बिना साँप और जल बिना मछली, वैसे ही मेरा जीवन आपके अधीन रहे। यह वर माँगकर वे चरण पकड़े रहे, और करुणानिधि ने कहा, ऐसा ही हो। अब मेरी आज्ञा मानकर इन्द्र की राजधानी में जाकर बसो। वहाँ बहुत भोग भोगकर, कुछ काल बीतने पर तुम अवध के राजा होगे, तब मैं तुम्हारा पुत्र बनूँगा।

151.1

सुनि मृदु गूढ़ रुचिर बर रचना । कृपासिन्धु बोले मृदु बचना ॥
जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीँ । मैँ सो दीन्ह सब संसय नाहीँ ॥

suni mṛdu gūr̤ha rucira bara racanā | kṛpāsindhu bole mṛdu bacanā ||
jo kachu ruci tumhare mana māhīm̐ | maim̐ so dīnha saba saṃsaya nāhīm̐ ||

151.2

मातु बिबेक अलौकिक तोरें । कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ॥
बन्दि चरन मनु कहेउ बहोरी । अवर एक विनती प्रभु मोरी ॥

mātu bibeka alaukika toreṃ | kabahum̐ na miṭihi anugraha moreṃ ||
bandi carana manu kaheu bahorī | avara eka vinatī prabhu morī ||

151.3

सुत-बिषइक तव पद-रति होऊ । मोहि बड़ मूढ़ कहइ किन कोऊ ॥
मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना । मम जीवन तिमि तुम्हहिँ अधीना ॥

suta-biṣaika tava pada-rati hoū | mohi bar̤a mūr̤ha kahai kina koū ||
mani binu phani jimi jala binu mīnā | mama jīvana timi tumhahim̐ adhīnā ||

151.4

अस बर माँगि चरन गहि रहेऊ । एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ ॥
अब तुम्ह मम अनुसासन मानी । बसहु जाइ सुरपति-रजधानी ॥

asa bara mām̐gi carana gahi raheū | evamastu karunānidhi kaheū ||
aba tumha mama anusāsana mānī | basahu jāi surapati-rajadhānī ||

151.सो॰ 151सोरठा

तहँ करि भोग बिसाल, तात गउँ कछु काल पुनि ।
होइहहु अवध-भुआल, तब मैँ होब तुम्हार सुत ॥

taham̐ kari bhoga bisāla, tāta gaum̐ kachu kāla puni |
hoihahu avadha-bhuāla, taba maim̐ hoba tumhāra suta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0