बालकाण्ड

अध्याय 147: प्रभु के रूप की शोभा

5 श्लोक · 147 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

प्रभु के रूप की शोभा

तुलसीदास उस रूप का वर्णन करते हैं जिसे मनु और शतरूपा ने देखा। शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा जैसा मुख, जो शोभा की सीमा है। सुन्दर गाल, ठोड़ी और शंख जैसी रेखाओं वाली ग्रीवा। लाल होठ, सुन्दर दाँत और नासिका, और ऐसी हँसी जो चन्द्रकिरणों को भी लजा दे। नए कमल जैसे नेत्र, मन को भाने वाली चितवन, कामदेव के धनुष जैसी भौहें और ललाट पर चमकता तिलक। कानों में मकराकृत कुण्डल, सिर पर मुकुट, और घुँघराले बाल मानो भौंरों का झुण्ड। वक्ष पर श्रीवत्स, सुन्दर वनमाला, रत्नहार और मणियों के आभूषण। सिंह जैसे कन्धे, सुन्दर जनेऊ, हाथी की सूँड जैसी भुजाएँ, कमर में तरकश और हाथ में धनुष बाण। बिजली को लजाने वाला पीताम्बर, पेट पर तीन सुन्दर रेखाएँ, और नाभि मानो यमुना के भँवर की छवि छीन लेती हो।

147.1

सरद-मयङ्क-बदन छबि सीवाँ । चारु-कपोल चिबुक दर ग्रीवाँ ॥
अधर-अरुन रद सुन्दर नासा । बिधु कर निकर बिनिन्दक हासा ॥

sarada-mayaṅka-badana chabi sīvām̐ | cāru-kapola cibuka dara grīvām̐ ||
adhara-aruna rada sundara nāsā | bidhu kara nikara binindaka hāsā ||

147.2

नव अम्बुज अम्बक-छबि नीकी । चितवनि ललित भावँती जी की ॥
भृकुटि मनोज-चाप छबि-हारी । तिलक ललाट-पटल दुतिकारी ॥

nava ambuja ambaka-chabi nīkī | citavani lalita bhāvam̐tī jī kī ||
bhṛkuṭi manoja-cāpa chabi-hārī | tilaka lalāṭa-paṭala dutikārī ||

147.3

कुंडल मकर मुकुट सिर भ्राजा । कुटिल केस जनु मधुप-समाजा ॥
उर श्रीबत्स रुचिर बनमाला । पदिक-हार भूषन मनि-जाला ॥

kuṃḍala makara mukuṭa sira bhrājā | kuṭila kesa janu madhupa-samājā ||
ura śrībatsa rucira banamālā | padika-hāra bhūṣana mani-jālā ||

147.4

केहरि-कन्धर चारु जनेऊ । बाहु बिभूषन सुन्दर तेऊ ॥
करि-कर सरि-सुभग भुजदंडा । कटि निषङ्ग कर सर कोदंडा ॥

kehari-kandhara cāru janeū | bāhu bibhūṣana sundara teū ||
kari-kara sari-subhaga bhujadaṃḍā | kaṭi niṣaṅga kara sara kodaṃḍā ||

दो॰ 147दोहा

तड़ित बिनिन्दक पीत-पट, उदर रेख बर तीनि ।
नाभि मनोहर लेति जनु, जमुन-भँवर छबि छीनि ॥

tar̤ita binindaka pīta-paṭa, udara rekha bara tīni |
nābhi manohara leti janu, jamuna-bham̐vara chabi chīni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0