सुनु सेवक सुरतरु-सुरधेनु । बिधि-हरि-हर-बन्दित पद-रेनू ॥
सेवत सुलभ सकल सुख दायक । प्रनत पाल सचराचर नायक ॥
sunu sevaka surataru-suradhenu | bidhi-hari-hara-bandita pada-renū ||
sevata sulabha sakala sukha dāyaka | pranata pāla sacarācara nāyaka ||
5 श्लोक · 146 में से 361
मनु विनती करते हैं, हे प्रभु, आप सेवकों के लिए कल्पवृक्ष और कामधेनु हैं, आपकी चरणरज की ब्रह्मा, विष्णु और शिव वन्दना करते हैं। आप सेवा से सुलभ, सब सुख देने वाले, शरणागत के रक्षक और चराचर के स्वामी हैं। हे अनाथों के हितकारी, यदि हम पर आपका स्नेह है तो प्रसन्न होकर यह वर दीजिए। जो रूप शिवजी के मन में बसता है, जो भुशुण्डि के मनरूपी मानसरोवर का हंस है, जिसे वेद सगुण और निर्गुण कहकर सराहते हैं, उसी रूप को हम नेत्र भरकर देखें। हे शरणागत के दुख हरने वाले, कृपा कीजिए। दम्पति के कोमल, विनीत और प्रेमरस में पगे वचन प्रभु को बहुत प्रिय लगे। तब भक्तवत्सल, कृपानिधान, विश्ववास भगवान प्रकट हुए, जिनके शरीर की शोभा देखकर करोड़ों कामदेव लजा जाएँ।
सुनु सेवक सुरतरु-सुरधेनु । बिधि-हरि-हर-बन्दित पद-रेनू ॥
सेवत सुलभ सकल सुख दायक । प्रनत पाल सचराचर नायक ॥
sunu sevaka surataru-suradhenu | bidhi-hari-hara-bandita pada-renū ||
sevata sulabha sakala sukha dāyaka | pranata pāla sacarācara nāyaka ||
जौँ अनाथ-हित हम पर नेहू । तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू ॥
जो सरूप बस सिव मन माहीँ । जेहि कारन मुनि जतन कराहीँ ॥
jaum̐ anātha-hita hama para nehū | tau prasanna hoi yaha bara dehū ||
jo sarūpa basa siva mana māhīm̐ | jehi kārana muni jatana karāhīm̐ ||
जो भुसुंडि-मन-मानस हंसा । सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा ॥
देखहिँ हम सो रूप भरि लोचन । कृपा करहु प्रनतारति-मोचन ॥
jo bhusuṃḍi-mana-mānasa haṃsā | saguna aguna jehi nigama prasaṃsā ||
dekhahim̐ hama so rūpa bhari locana | kṛpā karahu pranatārati-mocana ||
दम्पति बचन परम प्रिय लागे । मृदुल बिनीत प्रेम-रस पागे ॥
भगत-बछल प्रभु कृपानिधाना । विस्वबास प्रगटे भगवाना ॥
dampati bacana parama priya lāge | mṛdula binīta prema-rasa pāge ||
bhagata-bachala prabhu kṛpānidhānā | visvabāsa pragaṭe bhagavānā ||
नील सरोरुह नील मनि, नील नीरधर स्याम ।
लाजहिँ तनु सोभा निरखि, कोटि कोटि सत काम ॥
nīla saroruha nīla mani, nīla nīradhara syāma |
lājahim̐ tanu sobhā nirakhi, koṭi koṭi sata kāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0