बालकाण्ड

अध्याय 148: श्रीराम के वाम भाग में सीता

5 श्लोक · 148 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम के वाम भाग में सीता

प्रभु के चरणकमलों का वर्णन नहीं हो सकता, उनमें मुनियों के मनरूपी भौंरे बसते हैं। प्रभु के बाएँ भाग में सदा अनुकूल रहने वाली, शोभा की निधि और जगत की मूल आदिशक्ति विराजमान थीं, जिनके अंश से गुणों की खान अगणित लक्ष्मी, उमा और ब्रह्माणी उत्पन्न होती हैं और जिनकी भौंह के संकेत से जगत रचा जाता है। वही सीता श्रीराम के वाम भाग में हैं। शोभा के समुद्र हरि का रूप देखकर मनु और शतरूपा पलक रोककर एकटक देखते रहे और तृप्त न हुए। आनन्द के वश वे देह की सुध भूल गए और चरण पकड़कर दण्ड की तरह गिर पड़े। करुणापुंज प्रभु ने अपने करकमलों से उनके सिर छूकर तुरन्त उठा लिया। फिर कृपानिधान बोले, मुझे अत्यन्त प्रसन्न जानो और महादानी समझकर मन को भाने वाला वर माँगो।

148.1

पद-राजीव बरनि नहि जाहीँ । मुनि मन मधुप बसहिँ जिन्ह माहीं ॥
बाम भाग सोभति अनुकूला । आदि सक्ति छबि-निधि जग-मूला ॥

pada-rājīva barani nahi jāhīm̐ | muni mana madhupa basahim̐ jinha māhīṃ ||
bāma bhāga sobhati anukūlā | ādi sakti chabi-nidhi jaga-mūlā ||

148.2

जासु अंस उपजहिँ गुन खानी । अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी ॥
भृकुटि बिलास जासु जग होई । राम बाम-दिसि सीता सोई ॥

jāsu aṃsa upajahim̐ guna khānī | aganita lacchi umā brahmānī ||
bhṛkuṭi bilāsa jāsu jaga hoī | rāma bāma-disi sītā soī ||

148.3

छवि-समुद्र हरि रूप बिलोकी । एक टक रहे नयन पट रोकी ॥
चितवहिँ सादर रूप अनूपा । तृप्ति न मानहिँ मनु सतरूपा ॥

chavi-samudra hari rūpa bilokī | eka ṭaka rahe nayana paṭa rokī ||
citavahim̐ sādara rūpa anūpā | tṛpti na mānahim̐ manu satarūpā ||

148.4

हरष-बिबस तनु दसा भुलानी । परे दंड इव गहि पद पानी ॥
सिर परसे प्रभु निज-कर-कञ्जा । तुरत उठाये करुना-पुञ्जा ॥

haraṣa-bibasa tanu dasā bhulānī | pare daṃḍa iva gahi pada pānī ||
sira parase prabhu nija-kara-kañjā | turata uṭhāye karunā-puñjā ||

दो॰ 148दोहा

बोले कृपा-निधान पुनि, अति प्रसन्न मोहि जानि ।
माँगहु बर जोइ भाव मन, महादानि अनुमानि ॥

bole kṛpā-nidhāna puni, ati prasanna mohi jāni |
mām̐gahu bara joi bhāva mana, mahādāni anumāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0