बालकाण्ड

अध्याय 144: मनु और शतरूपा का तप

5 श्लोक · 144 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

मनु और शतरूपा का तप

वे साग, फल और कन्द खाते और सच्चिदानन्द ब्रह्म का स्मरण करते थे। फिर हरि के लिए तप करने लगे और मूल फल छोड़कर केवल जल के आधार पर रहने लगे। हृदय में निरन्तर एक ही अभिलाषा थी कि उन परम प्रभु को नेत्रों से देखें, जो निर्गुण, अखण्ड, अनन्त और अनादि हैं, जिन्हें वेद नेति नेति कहकर बताते हैं, और जिनके अंश से अनेक शिव, ब्रह्मा और विष्णु उत्पन्न होते हैं। ऐसे प्रभु भी सेवक के वश में रहते हैं और भक्त के लिए लीला शरीर धारण करते हैं। यदि वेद का यह वचन सत्य है, तो हमारी अभिलाषा पूरी होगी। इस प्रकार जल के आधार पर छह हजार वर्ष बीते, फिर सात हजार वर्ष वे वायु के आधार पर रहे।

144.1

करहिँ अहार साक फल कन्दा । सुमिरहिँ ब्रह्म सच्चिदानन्दा ॥
पुनि हरि हेतु करन तप लागे । बारि-अधार मूल फल त्यागे ॥

karahim̐ ahāra sāka phala kandā | sumirahim̐ brahma saccidānandā ||
puni hari hetu karana tapa lāge | bāri-adhāra mūla phala tyāge ||

144.2

उर अभिलाष निंरंतर होई । देखिय नयन परम प्रभु सोई ॥
अगुन अखंड अनन्त अनादी । जेहि चिन्तहिँ परमारथबादी ॥

ura abhilāṣa niṃraṃtara hoī | dekhiya nayana parama prabhu soī ||
aguna akhaṃḍa ananta anādī | jehi cintahim̐ paramārathabādī ||

144.3

नेति नेति जेहि बेद निरूपा । निजानंद निरुपाधि अनूपा ॥
सम्भु बिरज्चि बिष्नु भगवाना । उपजहिँ जासु अंस तेँ नाना ॥

neti neti jehi beda nirūpā | nijānaṃda nirupādhi anūpā ||
sambhu birajci biṣnu bhagavānā | upajahim̐ jāsu aṃsa tem̐ nānā ||

144.4

ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई । भगत हेतु लीला तनु गहई ॥
जौँ यह बचन सत्य स्त्रुति भाषा । तौ हमार पूजिहि अभिलाषा ॥

aiseu prabhu sevaka basa ahaī | bhagata hetu līlā tanu gahaī ||
jaum̐ yaha bacana satya struti bhāṣā | tau hamāra pūjihi abhilāṣā ||

दो॰ 144दोहा

एहि बिधि बीतें बरष षट, सहस बारि आहार ।
सम्बत सप्त-सहस्त्र पुनि, रहे समीर अधार ॥

ehi bidhi bīteṃ baraṣa ṣaṭa, sahasa bāri āhāra |
sambata sapta-sahastra puni, rahe samīra adhāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0