बालकाण्ड

अध्याय 129: नारद का गर्व उखाड़ने का संकल्प

5 श्लोक · 129 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

नारद का गर्व उखाड़ने का संकल्प

प्रभु आगे कहते हैं कि मोह उसी के मन में होता है जिसके हृदय में ज्ञान और वैराग्य नहीं, आप तो ब्रह्मचर्य व्रत में लगे धीरबुद्धि हैं, आपको कामदेव क्या पीड़ा दे सकता है? नारद ने अभिमान के साथ कहा कि भगवन्, यह सब आपकी कृपा है। करुणानिधि ने मन में विचारकर देखा कि मुनि के हृदय में गर्व का भारी वृक्ष अंकुरित हो गया है। उन्होंने निश्चय किया कि उसे शीघ्र ही उखाड़ फेंकूँगा, क्योंकि सेवक का हित करना मेरा प्रण है। तब नारद हरि के चरणों में सिर नवाकर बढ़े हुए अहंकार के साथ चल दिए। श्रीपति ने अपनी माया को प्रेरित किया। उसने मार्ग में सौ योजन का नगर रच दिया, जो वैकुण्ठ से भी बढ़कर था।

129.1

सुनु मुनि मोह होइ मन ताकें । ज्ञान बिराग हृदय नहिं जाके ॥
ब्रह्मचरज-व्रत-रत मतिधीरा । तुम्हहिँ कि करइ मनोभव पीरा ॥

sunu muni moha hoi mana tākeṃ | jñāna birāga hṛdaya nahiṃ jāke ||
brahmacaraja-vrata-rata matidhīrā | tumhahim̐ ki karai manobhava pīrā ||

129.2

नारद कहेउ सहित अभिमाना । कृपा तुम्हारि सकल भगवाना ॥
करुनानिधि मन दीख बिचारी । उर-अंकुरेउ गरब-तरु भारी ॥

nārada kaheu sahita abhimānā | kṛpā tumhāri sakala bhagavānā ||
karunānidhi mana dīkha bicārī | ura-aṃkureu garaba-taru bhārī ||

129.3

बेगि सो मैं डारिहउँ उखारी । पन हमार सेवक-हितकारी ॥
मुनि कर हित मम कौतुक होई । अवसि उपाय करब मैँ सोई ॥

begi so maiṃ ḍārihaum̐ ukhārī | pana hamāra sevaka-hitakārī ||
muni kara hita mama kautuka hoī | avasi upāya karaba maim̐ soī ||

129.4

तब नारद हरि-पद सिर नाई । चले हृदयँ अहमिति अधिकाई ॥
श्रीपति निज-माया तब प्रेरी । सुनहु कठिन करनी तेहि केरी ॥

taba nārada hari-pada sira nāī | cale hṛdayam̐ ahamiti adhikāī ||
śrīpati nija-māyā taba prerī | sunahu kaṭhina karanī tehi kerī ||

दो॰ 129दोहा

दो. बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं, सत जोजन विस्तार ।
श्रीनिवासपुर तेँ अधिक, रचना विविध प्रकार ॥

do. biraceu maga mahum̐ nagara tehiṃ, sata jojana vistāra |
śrīnivāsapura tem̐ adhika, racanā vividha prakāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0